जहां भी अन्याय, जुल्म और अनाचार है, उसके खिलाफ उठने वाली हर आवाज भगत सिंह है: शैलेन्द्र दुबे
जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून: अखिल भारत नागरिक परिषद के तत्वावधान में आज देहरादून में “मजदूर आंदोलन और शहीद-ए-आजम भगत सिंह” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वैचारिक कार्यक्रम का संयोजन उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन द्वारा किया गया, जिसमें वक्ताओं ने भगत सिंह के ऐतिहासिक संघर्षों को आज के दौर की चुनौतियों से जोड़कर देखा। संगोष्ठी ने यह संदेश दिया कि जब तक समाज में आर्थिक विषमता और मजदूरों का शोषण रहेगा, तब तक इंकलाब का नारा और भगत सिंह के विचार मार्गदर्शक बने रहेंगे।
हम भी मजदूरों के लीडर रहे हैं, समझते हैं पीड़ा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने कहा कि वह खुद कर्मचारी संगठनों
के नेता रहे हैं. ऊर्जा निगमों के संयुक्त मोर्चे का ज़ब गठन हुआ था वह उसके पहले संयोजक थे. उन्होंने कहा कि वह मजदूरों की पीड़ा समझते हैं. पिटकुल में ऊर्जा निगम में प्रबंध निदेशक का दायित्व मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का निराकरण करने का काम किया. वेतन विसंगतियों से लेकर प्रमोशन किए.उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठनों का दर्द वह भली भांति जानते हैं. कार्मिकों व कर्मचारी सांगठनों का उन्हें लगातार साथ मिला है और मिल रहा है. इसलिए कोशिश है कि किसी भी स्तर पर कार्मिकों का शोषण न हो. समस्याओं के समाधान के हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं.
इंकलाब अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का मुख्य हथियार
प्रबंध निदेशक श्री ध्यानी ने कहा कि जो मेहनत करके मेहनताना लेता है वह सभी श्रमिक हैं. कहा कि वह भी एक श्रमिक हैं. उन्होंने कहा की जिन भगत सिंह ने मजदूरों के लिए गोली खाई थी और देश में एक नई क्रांति लाई थी, उनके इंकलाब का नारा कभी रुकना नहीं चाहिए. इस दौरान उन्होंने कहा कि कार्मिकों की बदौलत ही घाटे में चल रहा पिटकुल आज 250 करोड़ के लाभ में है. और कई वर्षों से करीब साढ़े 6000 करोड़ के घाटे में चल रहे UPCL को भी लाभ में लाने के हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही हम इस चुनौती को पार कर लक्ष्य हासिल करने में कामयाब होंगे. अंत में उन्होने कहा की आजाद ए भगत सिंह मजदूरों और किसानों को समाज का असली रीढ़ मानते थे। यही कारण है कि आज के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य में मजदूर आंदोलन और भगत सिंह के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो चुके हैं।”
डॉ. शर्मा के जनगीतों के जरिए दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी व जनकवि डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि जो लोग सदियों तक याद रखे जाते हैं वे कभी मरते नहीं अमर हो जाते हैं. मरते वे लोग हैं, जो जीवित रहते हुए भी याद नहीं किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि भगत से हमें सीख मिलती है कि अपने अधिकारों के लिए व्यक्ति को लड़ना चाहिए और शोषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. उन्होंने जनगीतों के जरिये क्रांतिवीर भगत सिंह को याद किया. डॉ. शर्मा वो सख्शियत हैं, जिनके गीतों ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में क्रांति ला दी थी.
क्रांति का मतलब केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि शोषण आधारित व्यवस्था का अंत करना है: दुबे
संगोष्ठी में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन और मुख्य वक्ता शैलेन्द्र दुबे ने भगत सिंह के मूल क्रांतिकारी दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा, शहीद भगत सिंह केवल बम और पिस्तौल के क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वे एक गहरे विचारक थे जिनका मानना था कि क्रांति का मतलब केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि शोषण आधारित व्यवस्था का अंत है। आज दुनिया में जहां भी अन्याय, जुल्म और अनाचार है, उसके खिलाफ उठने वाली हर प्रतिरोधी आवाज वास्तव में भगत सिंह की ही चेतना है। कहा कि भगत सिंह ने असेंबली में बम फेंकने के बाद जो पर्चे बांटे थे, उनमें स्पष्ट रूप से ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल (मजदूर विरोधी कानून) और आम जनता के दमन का विरोध था।

आंदोलन की सफलता उसके उद्देश्य पर निर्भर करती है
मुख्य वक्ता श्री दुबे ने याद दिलाया कि 1928 में भगत सिंह और उनके साथियों ने ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) की स्थापना कर देश के सामने एक समाजवादी भारत का खाका रखा था। उनका संघर्ष केवल ब्रिटिश हुकूमत से आजादी तक सीमित नहीं था, बल्कि वे एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते थे जहां “मानव द्वारा मानव का शोषण” पूरी तरह समाप्त हो। उन्होंने समझाते हुए कहा कि आंदोलन की धार उसके उद्देश्य पर निर्भर करता है. आज जब सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण और श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर देश भर के बिजली कर्मचारी और मजदूर संघर्ष कर रहे हैं, तब भगत सिंह का यह सिद्धांत उत्पादक (मजदूर) को उसके श्रम का पूरा हक मिलना चाहिए”, आंदोलनों को एक नई दिशा और ऊर्जा देता है।
जुल्म का विरोध करना ही भगत सिंह
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और बाद में उनकी मृत्यु ने भगत सिंह और उनके साथियों को गहरे रूप से प्रभावित किया। इसके बाद भगत सिंह और राजगुरु ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सॉन्डर्स की हत्या कर लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने का प्रयास किया।
किसानों व मजदूरों को ज़ब तक राजनीतिक सत्ता में भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक देश का पूर्ण विकास संभव नहीं: जोशी
इस अवसर पर सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि नौजवान भारत सभा का उद्देश्य युवाओं, मजदूरों और किसानों को संगठित करना और एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक व शोषणमुक्त समाज की स्थापना के लिए संघर्ष करना था। भगत सिंह का स्पष्ट विचार था कि जब तक किसानों और मजदूरों को राजनीतिक सत्ता में वास्तविक भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक देश का पूर्ण विकास संभव नहीं है।
इंकलाब जिंदाबाद का नारा संघर्ष और परिवर्तन की चेतना का प्रतीक: इंसारूल
संयुक्त मोर्चा के संयोजक इंसारूल हक व विनोद कवि ने कहा कि आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूर आंदोलनों के बीच “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा संघर्ष और परिवर्तन की चेतना का प्रतीक बना हुआ है। भगत सिंह के विचार में इंकलाब का अर्थ केवल हिंसक परिवर्तन नहीं, बल्कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था का निर्माण था जिसमें पुरानी शोषणकारी व्यवस्था समाप्त होकर एक बेहतर और न्यायपूर्ण व्यवस्था के लिए रास्ता तैयार हो।
सामाजिक-आर्थिक न्याय के संघर्ष को दी नई दिशा
उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि भगत सिंह के विचार आज भी मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता के अधिकारों तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय के संघर्ष को नई दिशा देने वाले हैं।
संगोष्ठी कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में उत्तरांचल पावर इन्जीनियर्स एसोसिएशन से अध्यक्ष कार्तिकेय दुबे, महासचिव मुकेश कुमार, सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी, संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वाईएस तोमर, इन्शारुल हक, विनोद कवि, रेखा डंगवाल, गौरव शर्मा, अमित शर्मा, एनएस बिष्ट, वीरेंद्र पंवार, शिशिर श्रीवास्तव, मोहित डबराल, प्रदीप पंत, वीके सिंह, अरुणकांत, सीके पाण्डेय, अमित रंजन, अनिल मिश्रा, निशा रानी, मनीषा कौंसवाल, विवेक राजपूत, सुनील मोघा, पंकज सैनी, गौरव सकलानी, एसडीएस बिष्ट, मनोज अग्रवाल, राकेश कुमार, अरविन्द कुमार, प्रभाष डंगवाल, अर्चित भट्ट, कल्पना डोभाल, सौरभ पाण्डेय, महेश रावत समेत एसोसिएशन के दर्जनों मेंबर मौजूद रहे।