पेयजल निगम में स्थानांतरण और कार्यालय शफ्टिंग के साथ ही एमडी के पद पर नॉन टेक्निकल अफसर को जबरन बैठाए रखने का कड़ा विरोध, मुख्यमंत्री से की गई हस्तक्षेप की मांग

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल राजकाज
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– अभियंता बोले, कार्रवाई के नाम पर कार्यालय शिफ्ट करने का फरमान तुगलकी और हिटरलरशाही, कहा, नहीं करेंगे बर्दास्त

– समन्वय समिति ने भी किया कार्रवाई का कड़ा विरोध, निर्णय वापस न लेने पर दी बड़ा कदम उठाने की धमकी

– हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए राज्य सरकार से वरिष्ठ इंजीनियर को प्रबन्ध निदेशक बनाए जाने की उठाई गई पुरजोर मांग

जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड पेयजल निगम में विद्युत यांत्रिक मंडल और यांत्रिक शाखा देहरादून को पहाड़ में शिफ्ट करने के निगम प्रबंधन के निर्णय के बाद विभागीय अभियंताओं में भारी आक्रोश है। निगम प्रबंधन के इस फरमान को तगलकी और हिटलरशाही करार देते हुए कर्मचारी और अभियंता पुरजोर विरोध कर रहे हैं। अभियंताओं ने जनहित और विभागीय हित में यांत्रिक मंडल और यांत्रिक शाखा को यथावत पूर्व की भांति देहरादून में ही संचालित करने की गुहार लगाई है। इसके साथ ही मांग की है यदि जरूरत है तो नई टिहरी में नई शाखा खोली जाए।
बता दें कि कुछ दिन पहले अभियंताओं के बीच मारपीट की घटना सामने आई थी। जिसके बाद पेयजल निगम प्रबंधन ने आनन-फानन में देहरादून स्थित यांत्रिक मंडल को पौड़ी और यांत्रिक शाखा को नई टिहरी शिफ्ट करने के आदेश जारी किए थे। निगम प्रबंधन के इस आदेश से अभियंता काफी गुस्से में है और इस निर्णय को अभियंताओं के अधिकारों के खिलाफ बताया है।
अभियंताओं का कहना है कि ये कार्यवाही कार्मिकों के हित मे नहीं है। इसका अभियंताओं को भविष्य में बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
अभियंताओं का कहना है कि उत्तराखंड ही नहीं देश मे शायद ऐसा पहला विरला उदाहरण होगा, जहां अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर कार्यालय ही शिफ्ट कर दिए गए। जिसका खामियाजा एक-दो नहीं भविष्य में दर्जनों अभियंताओं को भुगतना पड़ेगा।
अभियंताओं का यह भी कहना है कि यदि यांत्रिक डिवीजन देहरादून के अधिशासी अभियंता का स्थानांतरण करना ही था तो उन्हें किसी दूसरी शाखा में भी किया जा सकता था। उनके स्थानांतरण के साथ पूरे डिवीजन को शिफ्ट करना औचित्यहीन है। इस डिवीजन में कार्यरत स्टाॅफ का क्या कसूर है, उन्हें किस बात की सजा दी जा रही है। बगैर व्यवस्था बनाए आनन-फानन में कार्यालय शिफ्ट करने से निर्माण कार्य भी प्रभावित होंगे। कहा कि एक ही कार्यालय दो-दो अधिकारियों के नियंत्रण से भी कई तरह की अड़चने पैदा करंगे। कहा कि ऐसी कार्रवाई की अभियंता घोर निंदा करते हैं।
कार्यालय शिफ्ट करने के प्रबंधन के निर्णय को कोर्ट में चैलेंज करने को चेताया
अभियंताओं ने देहरादून में यांत्रिक सर्किल और डिवीजन के पहाड़ में शिफ्ट होने के कई नुकसान गिनाए हैं। कहा कि भविष्य में यदि दुर्गम क्षेत्रों में लंबी सेवाएं देने के बाद यदि सुगम में देहरादून आना चाहें, तो उनके लिए तो ये दरवाजे बंद हो गए हैं। क्या यह कार्रवाई कार्मिकों के हितों के विरुद्ध नहीं है? बताया जा रहा है कि जेजेएम योजना के तहत कार्य की अधिकता के चलते कार्यालय शिफ्ट किए गए हैं। इस पर अभियंताओं का कहना है कि कार्य की अधिकता है तो ऊधमसिंहनगर की तरह नई टिहरी में भी नया डिवीजन खोला जा सकता था। कार्यालय शिफ्ट करना न्यायसंगत नहीं है। अभियंताओं का कहना है कि प्रबंधन के इस निर्णय का विरोध ही नहीं बल्कि न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाना पड़े तो उसके लिए भी वह पीछे नहीं हटेंगे।

समन्वय समिति भी कार्रवाई से आक्रोश में, कहा, निर्णय वापस नहीं लिया तो परिणाम भुगतने को तैयार रहे सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के चम्पावत उप चुनाव के बीच पेयजल निगम में स्थानांतरण और कार्यालय शफ्टिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अभियंताओं के बाद अओ धिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति, पेयजल निगम ने भी इस कार्रवाई का घोर विरोध किया है। समिति ने अधिशासी अभियंता जितेंद्र सिंह देव के स्थानांतरण को निरस्त करने के साथ ही प्रबंधन से कार्यालय शफ्टिंग के अपने निर्णय को वापस लेने की मांग की है। ऐसा न करने पर समिति पदाधिकारियों ने गम्भीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

समिति के पदाधिकारियों ने शासन को पूर्व में किए गए राजकीयकरण एवं कोषागार से वेतन के वादे की याद दिलाते हुए कहा कि वर्तमान में संघर्ष के महत्वपूर्ण पड़ाव पर अत्यधिक परसूएसन की आवश्यकता है। इसके लिए समन्वय समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र देव के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व की अत्यंत आवश्यकता बताई। लेकिन एकाएक जितेंद्र देव का स्थानांतरण करके संघर्ष को खत्म करने का काम किया गया है। समिति पदाधिकारियों ने स्थानांतरण को संघर्ष एवं संगठन हित के विरुद्ध बताते हुए शासन और निगम प्रबंधन से इस कार्यवाही स्थगित करने की मांग की है।

समिति के महामंत्री विजय खाली का कहना है कि शासन पहले राजकीयकरण की मांग को पूरा करें, उसके बाद ही दमन्वय समिति के अध्यक्ष के स्थानांतरण पर विचार करे। कहा कि संगठन के अध्यक्ष का स्थानांतरण वर्तमान नीति एवं नियमों के भी विरुद्ध है। इसलिए तत्काल स्थानांतरण निरस्त किया जाए। बताया कि समन्वय समिति द्वारा निर्णय लिया गया कि स्थानांतरण  एवं कार्यालय शिफ्टिंग को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने धमकी भरे अंदाज में चेताया कि यदि शासन एवं निगम प्रबंधन ने इस निर्णय को शीघ्र वापस नहीं लिया तो समन्वय समिति बड़ा कदम उठाएगी। तब चाहे परिणाम जो भी होंगे इसकी उन्हें कोई चिंता नहीं है। इसकी पूर्ण जबावदेही शासन और निगम प्रबंधन की होगी।

विभागीय वरिष्ठ अभियंता को प्रबन्ध निदेशक बनाने की भी फिर उठी मांग

पेयजल निगम में समन्वय समिति के अध्यक्ष के स्थानांतरण और कार्यालय शिफ्टिंग के निगम प्रबंधन के आदेश से क्षुब्ध कार्मिकों और अभियंताओं ने विभागीय वरिष्ठ अभियंता को प्रबन्ध निदेशक बनाने की मांग फिर से उठाई है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी एमडी के पद पर होता तो कार्यालय शिफ्टिंग जैसे हिटलरशाही निर्णय नहीं होते। उनका कहना है कि एक तो निगम के पास कार्मिकों के वेतन के लाले पड़े हैं, ऊपर से कार्यालय शिफ्टिंग और नई शाखाएं खोलकर निगम के वित्तीय संकट को और बढाया जा रहा है। यह निर्णय निगम हित में कार्मिकों को मंजूर नहीं है। इस मामले में अभी कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन निगम कार्मिकों में अंदर ही अंदर असंतोष की आग सुलग रही है। कार्मिकों के आक्रोश की ये चिंगारी कभी भी बड़ा रूप ले सकती है। इसलिए समय रहते सरकार को इस मसले पर शीघ्र विचार करने की जरूरत है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि पेयजल निगम पूरी तरह इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट है, जिसमें एमडी का पद भी इंजीनियरिंग कैडर का हैं। ऐसे पेयजल निगम में एमडी के पद पर गैर इंजीनियर की नियुक्ति नियमावली के खिलाफ है। एमडी को तकनीकी ज्ञान होना बेहद जरूरी है, इसके अभाव में तमाम परियोजनाओं को अपेक्षित गति नहीं मिल पाती है।  वर्तमान में निगम में यही सब कुछ हो रहा है। तमाम योजनाएं लंबित हैं। लगातार कर्मचारियों के हितों के खिलाफ निर्णय लिए जा रहें है। कार्मिकों के नियमित वेतन भुगतान को लेकर लंबे समय से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

कर्मचारी नेताओं का यह भी कहना है कि वर्तमान एमडी के पास दूसरे विभागों की जिम्मेदारी है। वह पेयजल निगम को नियमित रूप से समय नहीं दे पा रहे हैं। एमडी के नियमित कार्यालय में न बैठने से जहां तमाम योजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है। वहीं कार्मिकों की तमाम समस्याएं भी लटकी पड़ी हैं। वर्षों पुराने ढर्रे पर ही निगम को चलाया जा रहा है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि तकनीकी विभाग को चलाने के लिए  तकनीकी अफसर की नितांत जरूरत है। इसलिए जल्द से जल्द निगम में वरिष्ठ इंजीनियर को एमडी बनाया जाए। कहा कि हाईकोर्ट ने भी वरिष्ठ इंजीनियर को एमडी बनाने के आदेश दिए हैं। जिस पर शीघ्र शासन को निर्णय लेना चाहिए। उनका कहना है कि एमडी का पद प्रमोशन का पद है, जिस पर गैर इंजीनियर की नियुक्ति करके शासन और सरकार मनमानी नहीं कर सकते हैं। इस निर्णय का शुरू से ही पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी एमडी के पद से गैर विभागीय अधिकारी को न हटाना कोर्ट की अवमानना है। साथ ही न्यायालय के प्रति सरकार की न्यायप्रिय सरकार पर भी यह सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी एमडी का पद से चिपके रहना उचित नहीं है। यह सरकार की पारदर्शी सिस्टम और न्यायालय को सीधी चुनौती है। कहा कि नियमावली के विरुद्ध की गई नियुक्ति को कोर्ट के द्वारा गलत ठहराए जाने के बाद भी शासन द्वारा एमडी के पद पर गैर इंजीनियर को जबरन बैठाए रखना विभागीय हित में नहीं है। इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी हस्तक्षेप की मांग की गई है।

 

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