वित्त सचिव पर भड़के गुस्साए पेयजल कार्मिक, नो पे-नो वर्क के साथ करेंगे भूख हड़ताल शुरू

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल
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जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड पेयजल निगम, अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति का गुस्सा सातवें आसमान पर है। पेयजल कर्मी राजकीयकरण के साथ ही कार्मिकों को राज्य कर्मचारियों की भांति हर माह वेतन और पेंशन ट्रेजरी से भुगतान करने की मांग को लेकर फिर से आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं। सरकार के बजाय आंदोलित आक्रोशित कार्मिकों ने खुद ही नो पे- नो वर्क लागू करके मंगलवार से निगम मुख्यालय में आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है।

सोमवार को पेयजल निगम मुख्यालय में आयोजित आम बैठक में जल निगम समन्वय समिति के पदाधिकारियों द्वारा सभी सदस्यों की उपस्थिति में यह निर्णय लिया गया कि मंगलवार से जल निगम में नो पे – नो वर्क लागू किया जाएगा। सरकार द्वारा पूर्व में भी की गई हड़ताल में नो वर्क नो पे लागू किया जाता रहा है, लेकिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में पहला अवसर होगा जब नो पे- नो वर्क कर्मचारियों द्वारा स्वयं लागू किया गया है।

समन्वय समिति के मीडिया प्रभारी एवं उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ के प्रांतीय महासचिव अजय बेलवाल ने बताया कि जल निगम कार्मिकों को माह नवंबर का वेतन और पेंशन 28 दिन गुजरने के बाद भी 28 दिसंबर तक प्राप्त नहीं हुआ है। जबकि वेतन भुगतान अधिनियम 1936 के अनुसार कार्मिकों की संख्या 1000 तक होने पर प्रत्येक माह की 7 तारीख तक वेतन का भुगतान किया जाना अनिवार्य है।  कार्मिकों की संख्या 1000 से अधिक होने पर प्रत्येक माह की 10 तारीख तक वेतन का वितरण किया जाना संबंधित नियोक्ता का दायित्व है।

समन्वय समिति के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह देव ने कहा कि उत्तराखंड पेयजल निगम में 3000 कार्मिकों को पिछले 28 दिनों से वेतन नहीं मिला है। उत्तराखंड शासन और सरकार द्वारा वेतन भुगतान अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है जो दंडनीय अपराध है और श्रम कानूनों के विपरीत है। वेतन भुगतान न होने पर कार्मिकों को कार्य करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, वेतन भुगतान न होने पर भी पेयजल निगम के कार्मिक दिन-रात जल जीवन मिशन कार्यों को युद्ध स्तर पर कर रहे हैं।

देव ने कहा कि कार्मिकों को कोषागार से वेतन देने के सहमति के बाद भी शासनादेश जारी न करना और लगातार वेतन से वंचित करना पेयजल निगम कार्मिकों के साथ अत्याचार है। जहां एक और अन्य विभागों के कर्मचारी अपने वेतन भक्तों को बढ़ाने की मांग पर हड़ताल पर चले जाते हैं वहीं पेयजल निगम के कर्मचारी अथक मेहनत करने के बाद भी अपने अधिकार से वंचित हैं।

नेताद्वय ने बताया कि एकमत से निर्णय लिया गया कि वेतन भुगतान की समय सीमा समाप्त होने के दृष्टिगत मंगलवार 28 दिसंबर 2021 से पेयजल निगम के सभी अधिकारी कर्मचारी नो पे- नो वर्क पर चले जाएंगे। इसके अंतर्गत कार्य स्थलों पर चल रहे सभी निर्माण कार्यों का अनुश्रवण भी बंद हो जाएगा। साथ ही निगम के अंतर्गत संचालित पेयजल योजनाओं में कोई व्यवधान आने पर उसके निराकरण के लिए कोई कार्यवाही नहीं करेंगे। इस कारण यदि पेयजल समस्या का संकट उत्पन्न होता है तो उसके लिए पूर्ण रूप से निगम प्रबंधन जिम्मेदार होगा।

आम बैठक में सामूहिक निर्णय लिया गया कि नो पे – नो वर्क और आमरण अनशन मांग पूरी होने तक जारी रहेगा ,चाहे इसके लिए पेयजल निगम के कार्मिकों को कोई भी बलिदान देना पड़े। मंगलवार से पेयजल निगम अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष इंजीनियर जितेंद्र सिंह देव और प्रांतीय महामंत्री विजय खाली आमरण अनशन पर बैठेंगे तथा जबकि उनके समर्थन में पेंशनर्स एसोसिएशन के महामंत्री ईश्वर पाल शर्मा क्रमिक अनशन पर बैठेंगे।

पेयजल निगम कार्मिकों की मांगों के समर्थन में जल संस्थान के संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष रमेश बिंजोला, श्याम सिंह नेगी मंडल अध्यक्ष, राजेंद्र महतोलिया ने आम बैठक में शिरकत की। उन्होंने कहा कि जल निगम की समय पर वेतन की मांग पूरी तरह से जायज है। कार्मिकों के शोषण के खिलाफ जल संस्थान भी आंदोलन में प्रतिभाग करेगा।

आम बैठक में समन्वय समिति के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह देव और महामंत्री विजय खाली के अलावा सौरभ शर्मा, रामकुमार, अजय बेलवाल, विजेन्द्र सुयाल, भजन सिंह चौहान, गौरव बर्तवाल, लक्ष्मी नारायण भट्ट ,विशेष शर्मा राजेन्द्र सिंह राणा, प्रमोद नौटियाल, धर्मेंद्र चौधरी, कमल कुमार आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

बोले कार्मिक, फाइल साइन को मुंह खोले वित्त विभाग

पेयजल निगम के आक्रोशित कार्मिकों सोमवार को आम सभा से पूर्व आयोजित धरने में वित्त विभाग को जमकर कोसा। कर्मचारी नेताओं ने शासन के वित्त विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह विभाग उत्तराखंड का सबसे भ्रष्ट विभाग है। कहा कि उत्तराखंड में नदियां इतनी दमखम रखती हैं कि प्रदेश को अकेले खनन का राजस्व चला सकता है, लेकिन इसमें बड़ा खेल चलता है। लेकिन जिस वित्त विभाग के पास राजस्व बढाने की जिम्मेदारी है वह खुद इस खेल में शामिल है। आज नदियों में जहां-तहां नदियों में अवैध खनन चरम पर है। कहा कि अवैध खनन को खुली छूट देना उचित है और पेयजल कार्मिकों को ट्रेजरी से वेतन देना अनुचित है। यह वित्त विभाग का कौन सा न्याय है। गुस्साए कार्मिकों ने कहा कि ट्रेजरी से वेतन देने को लेकर पेयजल मंत्री के साथ ही निगम प्रबंधन और सचिव पेयजल ने स्वीकृति दे दी है। इसके बाद वित्त सचिव अमित नेगी क्यों फाइल पर कुंडली मार कर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि यह वित्त विभाग के भ्रष्टाचार को दर्शाता है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि वह वित्त विभाग के भ्रष्टाचार को भी आंदोलन में शामिल करेंगे। उन्होंने कहा कि फाइल साइन करने के लिए वित्त विभाग अपने रेत खोल दे और बताएं कि कितना चाहिए। वित्त सचिव मुंह खोलें, तो सभी कार्मिक अपनी तनख्वाह से पैसे जुटाकर दे देंगे।

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