उत्तराखंड पेयजल निगम में 5 इंजीनियर मुख्य अभियन्ता के पदों पर पदोन्नत

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल राजकाज
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– सीनियरिटी को लेकर विवादास्पद एक अभियन्ता को कोर्ट के आदेश और नियमों के विपरीत पदोन्नति देने पर कठघरे में शासन की कार्यप्रणाली 

जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड पेयजल निगम में आखिरकार लम्बे समय से विवादास्पद चल रही वरिष्ठता सूची से अधीक्षण अभियंता (सिविल) के 5 अभियन्ताओं को मुख्य अभियंता स्तर-2 के पदों पर पदोन्नत किया गया है। डीपीसी के बाद सोमवार को शासन ने पदोन्नति आदेश जारी कर दिए हैं। सभी अभियन्ताओं को उनके वर्तमान कार्यभार ग्रहण करने वाले कार्यालयों में ही पदोन्नति का लाभ दिया गया है।

जिन अधीक्षण अभियन्ताओं को मुख्य अभियन्ता बनाया गया है उनमें अपर परियोजना निदेशक जल जीवन मिशन का कार्यभार देख रहे  एसके पन्त, मयख महाप्रबंधक निर्माण विंग सुभाष चन्द्र चौहान, मुख्य अभियंता मुख्यालय सुरेश चंद्र पन्त, मयख अभियन्ता कुमाऊँ विनोद कुमार पन्त और मयख अभियन्ता पौड़ी गढ़वाल केके रस्तोगी शामिल है।

उधर, एक विवादास्पद अभियन्ता की मुख्य अभियंता स्तर-2 के पद पर पदोन्नति देने पर शासन की कार्यप्रणाली कठघरे में खड़ी हो गई है। यह सर्वविदित है कि प्रभारी मुख्य अभियंता पौड़ी केके रस्तोगी की सीनियरिटी लम्बे समय से विवादों के घेरे में है।

रस्तोगी पर सहायक अभियंता सिविल की वरिष्ठता सूची में छेड़छाड़ कर अपनी सीनियरिटी कई वरिष्ठतम अभियन्ताओं से ऊपर रखने का आरोप है। जिसकी तमाम स्तरों पर शिकायतें की गई है।

क्या यह जांच का विषय नहीं है कि सिनियरिटी लिस्ट में केके रस्तोगी एकाएक कैसे ऊपर हो गए हैं। शिकायतों का निस्तारण किए बगैर शासन ने मनमानी से केके रस्तोगी को सेवा नियमावली के विपरीत ही नहीं हाईकोर्ट के आदेश की भी अनदेखी करके नोशनल पदोन्नति दी है। मामले में हाईकोर्ट के आदेश को शासन ने संज्ञान लेने के बजाय क्यों छिपाया है,  इसको लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं।

यह पूरा प्रकरण सचिव पेयजल नितेश झा और पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल के संज्ञान में होने के बाद भी केके रस्तोगी को प्रमोशन देना बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर एक अभियन्ता पर इतनी मेहरबानियां किसलिए? इसको लेकर निगम में कई तरह की चर्चा है।

 

 

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