सरकार का बड़ा निर्णय: उत्तराखंड पेयजल निगम में सेंटेज व्यवस्था समाप्त, सीधे कोषागार से मिलेगी वेतन-पेंशन

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– सरकार द्वारा मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने पर खुशी से झूम उठे कार्मिक, निगम मुख्यालय से लेकर मंत्री आवास पर गूंजे ढोल नगाड़े

– समझौता बैठक का कार्यवृत्त जारी होने के बाद पेयजल कर्मियों की हड़ताल स्थगित, राजकीयकरण की मांग पर संघर्ष जारी रखने का ऐलान

जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड पेयजल निगम कार्मिकों का संघर्ष आखिर रंग लाया है। सरकार ने कार्मिकों के वेतन-भत्तों का स्थाई समाधान का निर्णय लिया है। पेयजल निगम में सैंटेज व्यवस्था को खत्म कर लिया गया हैं। अब कार्मिकों और पेंशनर्स को हर माह कोषागार से भुगतान किया जाएगा। इस संबंध में मंगलवार को पेयजल मंत्री की शासन, निगम प्रबंधन और अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के पदाधिकारियों के साथ हुए बैठक का बुधवार को कार्यवृत्त जारी कर दिया गया है। जल्द ही कार्यवृत्त का शासनादेश जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह कार्मिकों के आंदोलन की बड़ी सफलता है। उत्तराखंड में निगम को लेकर अभी तक की किसी भी सरकार का यह अब तक का सम्भवतः सबसे बड़ा फैसला है। उधर सरकार के द्वारा मांग पर सकारात्मक निर्णय लिए जाने के बाद समन्वय समिति ने 28 अक्तूबर से प्रस्तिावित हड़ताल को तीन सप्ताह के लिए वापस ले लिया है। दिवाली से पूर्व सरकार द्वारा कार्मिक हिट में लिए गए इस निर्णय से कार्मिकों में जश्न का माहौल है।

उत्तराखंड पेयजल निगम का मोहनी रोड स्थित मुख्यालय बुधवार को ढोल नगाड़ों से गूंजायमान हो उठा। वार्ता का कार्यवृत्त जारी होते ही निगम मुख्यालय में धरने पर बैठे कार्मिक खुशी से झूमे उठे। बाद में कार्मिकों ने मुख्यमंत्री से लेकर विभागीय मंत्री, पेयजल निगम प्रबंधन और शासन के अफसरों के जयकारे भी लगाए। धामी सरकार ने वर्षों पुरानी मुराद को पूरा करके पेयजल कार्मिकों की सबसे बड़ी समस्या का समाधान किया है। इस खुशी में कार्मिकों ने धरना स्थल पर मिष्ठान वितरण कर खुशी जताई।


बता दें कि पेयजल निगम को मिलने वाले काम के एवज में 12.5 प्रतिशत सैंटेज प्राप्त होता है, जिससे कार्मिकों केे वेतन-भत्ते और पेंशन आदि का भुगतान होता है। लेकिन लंबे समय से सैंटेज की राशि का शासन से समय पर भुगतान न होने की वजह से कार्मिकों को तीन-तीन, चार-चार माह में एक माह का वेतन बमुश्किल मिल पा रहा है। लगातार वेतन-पेंशन को लेकर कार्मिकों को हर बार आंदोलन करना पड़ रहा है।

इस बार निगम कार्मिकों के कर्मचारी संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए पेयजल निगम के राजकीयकरण और स्थाई वेतन के समाधान की मांग को लेकर आंदोलन शुरु किया। सरकार द्वारा फिलहाल वेतन-भत्तों और पेंशन आदि के हर माह भुगतान की व्यवस्था सुश्चित किए जाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। शासन ने वित्त विभाग की सहमति के बाद कार्मिकों को टेजरी के माध्यम से वेतन भुगतान की मांग को मान लिया है।

ये हैं कार्यवृत्त के मुख्य बिंदु

– पेयजल निगम के राजकीयकरण के प्रकरण पर विचार के लिए गठित समिति की रिपोर्ट आने पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।

– वर्तमान में उत्तराखंड पेयजल निगम को उनके द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर 12.5 प्रतिशत सैंटेज दी जा रही है। इसके अतिरिक्त पेयजल निगम में वास्तविक अधिष्ठान व्यय और अर्जित सैंटेज के अंतर की प्रतिपूर्ति भी शासन द्वारा अनुदान के रुप में की जाती है। इस सबंध में यह निण्रय लिया गया कि उत्तराखंड पेयजल निगम को अग्रेत्तर निर्माण कार्यों में प्रतिशत के आधार पर सैंटेज देय नहीं होगी, अपितु कार्मिकों को वेतन, पेंशन, भत्तों एवं अन्य अधिष्ठान संबंध व्यय राज्य सरकार द्वारा योजना मद में ही सैंटेज रुप में एकमुश्त भारित किए जाएंगे। प्रत्येक माह वेतन-पेंशन का भुगतान कोषागार के माध्यम से सीधे किया जाएगा।

– यह भी निर्णय लिया गया कि पेयजल निगम में सैंटेज व्यवस्थ्ज्ञा समाप्त होने और उनके वेतन-भत्तों का भुगतान कोषागार के माध्यम से होने के दृष्टिगत वेतन-भत्तों और अन्य भत्तों से संबंधित शासनादेष उत्तराखंड पेयजल निगम में स्वतः ही लागू हो जाएंगे।

– पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने यह भी निर्देश दिए कि उक्त बिंदुओं पर शासन स्तर से शीघ्र कार्यवाही की जाए।

– कार्यवृत्त जारी होने के बाद अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति द्वारा 28 अक्तूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।

पेयजल मंत्री चुफाल का जताया आभार

समझौता बैठक का कार्यवृत जारी होने के बाद अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह देव के नेतृत्व में कर्मचारी नेता ढोल-नगाड़े के साथ पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल के आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने कार्मिकों की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए मंत्री का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए फूल मालाओं से आभार जताया और मंत्री को मिठाई भी खिलाई। मंत्री ने भी कर्मचारी नेताओं को मिष्ठान खिलाकर बधाई ली। इस दौरान पेयजल मंत्री ने समिति पदाधिकारियों को भी बधाई देते हुए कहा कि युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धाकी के नेतृत्व में सरकार निरंतर कर्मचारी हितों को लेकर निर्णय ले रही है। उन्होंने कर्मचारी नेताओं से अपील की है कि सरकार ने जिस तेजी के साथ कार्मिकों की समस्या का समाधान करने का प्रयाास किया है उसी गति से अधिकारी-कर्मचारी जनता की पेयजल समस्याओं के समाधान के प्रयास करेंगे। उन्होंने कार्मिकों को कड़ी मेतहनत करके जल जीवन मिशन समेत सभी पेयजल योजनओं को समय पर पूरा करने का आह्वान किया है।

इनका भी किया धन्यवाद ज्ञापित  

मांग पर सकारात्मक निर्णय के लिए समन्वय समिति ने मंत्री बिशन सिंह चुफाल के अलावा सचिव पेयजल नितेश झा, सचिव वित्त, अपर सचिव एवं प्रबंध निदेशक उदयराज सिंह और मुख्य अभियंता मुख्यालय एससी पंत का विशेष आभार प्रकट किया। समिति अध्यक्ष जितेंद्र सिंह देव ने कहा कि कार्मिकों की समस्याओं को समझते हुए जिस तरह निगम प्रबंधन और शासन ने बड़ा निर्णय लेकर समाधान का प्रयास किया है उसके लिए पेयजल निगम के सभी अधिकारी और कर्मचारी उनके आभारी हैं। उन्होंने भी मंत्री और अफसरों को आश्वासन दिया कि इस निर्णय के बाद कार्मिक उत्साहित हैं और कार्मिकों का यह उत्साह निश्चित रुप में विभागीय कार्यों में तेजी लाएगा।

हड़ताल तीन सप्ताह के लिए स्थगित

कोषागार से वेतन-पेंशन भुगतान का शासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद समन्वय समिति ने 3 सप्ताह के लिए हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया है। निगम मुख्यालय में आयोजित समन्वय समिति की कोर कमेटी की बैठक में हड़ताल स्थगत की घोषणा से पूर्व समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह देव और महामंत्री विजय खाली ने इस जीत के लिए आंदोलित प्रदेश के सभी पेयजल अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कार्मिकों का संघर्ष का नतीजा है कि आज सरकार ने उनकी बात को सुना ही नहीं है उसके समाधान के प्रयास भी किए हैं। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के लिए निगम का हर एक अधिकारी और कर्मचारी हकदार है। उन्होंने कहा कि कार्यवृत्त के बाद जल्द से जल्द शासनादेश जारी करने का प्रयास किया जाएगा। एकीकरण के लिए भी समन्वय समिति सरकार के जल्द निर्णय की प्रतीक्षा में है। यदि इस मांग पर भी जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो समन्वय समिति विचार-विमर्श के बाद आगे का कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि जल पेयजल कार्मिकों को राजकीय कार्मिकों की भांत वेतन-पेंशन और भत्ते मुहैया होंगे, तो पेयजल निगम को राजकीय विभाग घोषित करने में सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि वेतन-पेंशन की तरह सरकार राजकीयकरण की मांग को भी जल्द से जल्द पूरा करेगी। बैठक में जितेंद्र सिंह देव, विजय खाली, एससी पंत, रामकुमार, अजय बेलवाल, पीएस रावत, दिनेश भंडारी, रकमपाल, गौरव बत्र्वाल, नवीन चैधरी, लक्ष्मी भट्ट, बालम नेगी, महेंद्र कुमार आदि मुख्य रुप से मौजूद रहे।

ये रहे धरने पर मौजूद

पेयजल निगम मुख्यालय में चल रहे धरने पर बुधवार को कर्मचारी नेता विजय खाली, सौरभ शर्मा, रामकुमार, अजय बेलवाल, आरसी मिश्रा, मोहम्मद मिशम, राजेश सिंह, सीताराम, एसके बर्नवाल, हेम चन्द्र जोशी, अरविंद सजवाण, नन्द किशोर सती, कशोर सती, अंजली पंवार, मीनाक्षी खंडूड़ी, आरके चौहान, बीएस रावत, गीता, प्रीतम सिंह, नवीन चौधरी, नवीन थापा, एम हसन, महेश चंद्र, ललित पुरोहित, पल्लवी, कुंदन सिंह बिष्ट, प्रमोद कोठियाल, मातवर सिंह बिष्ट, दिनेश जोशी, राजेंद्र राणा, मनमोहन नेगी, कुलदीप कुमार, भजन सिंह, प्रमोदन सिंह, दीपा उप्रेती, मीरा सेठी, उषा, मनवर सिंह रावत, केएम जुयाल, केबी पांडे, केके पांडे, कौशल वर्मा, सुमित पुन, बीएमएस बड़थ्वाल, सुभाष कोटनालादीक्षा नौटियाल, लिपिका कवि और एसके सिंघल आदि शामिल रहे।

 

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