गुस्से में पेयजल कर्मी, ट्रेजरी से वेतन-पेंशन का शासनादेश जारी न होने पर 28 से बेमियादी अनशन शुरू करने का किया ऐलान

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल
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•  अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने लिया बड़ा निर्णय, समिति के अध्यक्ष और महामंत्री 28 दिसंबर से पेयजल निगम मुख्यालय में शुरू करेंगे भूख हड़ताल

जनपक्ष टुडे संवाददाता, देहरादून। अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति, उत्तराखंड पेयजल निगम की बैठक में समझौते के बावजूद दो माह बाद भी शासन स्तर पर मांगों का निस्तारण न होने पर गहरी नाराजगी जताई गई। कर्मचारी नेताओं ने एलान किया कि यदि समझौते के अनुरूप कार्मिकों का जल्द से ट्रेजरी से वेतन, पेंशन भुगतान के आदेश जारी नहीं हुए तो 28 दिसंबर से समिति के अध्यक्ष और महामंत्री आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे।

शुक्रवार को उत्तराखंड पेयजल निगम मुख्यालय में हुई बैठक में निगम प्रबंधन और शासन स्तर पर पूर्व में दिए गए आश्वासनों की समीक्षा की गई। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि 27 अक्तूबर 2012 को को पेयजल मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई आश्वासन दिए गए थे। तब यह हुआ था कि हर महीने कार्मिकों वेतन, पेंशन का भुगतान कोषागार के माध्यम से किया जाएगा।

इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ रहा है। निर्माण कार्यों एवज में साढ़े 12.5 प्रतिशत सेंटज मिलता है। सेंटज और खर्चे के अंतर की भरपाई शासन अनुदान के रूप में करता है। ऐसे में तय हुआ था कि शासन सेंटज भुगतान करने की बजाय सीधे ट्रेजरी के माध्यम से वेतन भुगतान करेगा।

यह भी तय हुआ था कि उत्तराखंड पेयजल निगम में सेंटज व्यवस्था समाप्त होने तथा उनके वेतन-भत्तों का भुगतान कोषागार के माध्यम से होने पर वेतन-भत्तों एवं अन्य भत्तों से सम्बन्धित शासनादेश पेयजल निगम में खुद ही लागू हो जाएंगे। आश्वासन दिया गया था कि 15 दिन के भीतर शासनादेश पेयजल निगम द्वारा जारी कर दिया जाएगा। दो महीने गुजरने के बाद भी अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है। वित्त विभाग ने फाइल को पिछले डेढ़ महीने से लंबित रखा है।

मांग पूरी होने पर हड़ताल से भी राहत मिलेगी, कर्मचारी भी मन से काम करेंगे। कर्मचारी अपनी मांग को लेकर आंदोलन न कर सकें इसके लिए छह महीने के लिए हड़ताल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। नो वर्क नो पे की चेतावनी दी जा रही है। ये पूरी तरह जायज नहीं है।

बैठक में तय हुआ कि इस बार सीधे हड़ताल नहीं की जाएगी। समिति के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह देव और महामंत्री विजय खाली आमरण अनशन पर बैठेंगे। ऐसे में यदि कर्मचारी स्वयं ही कार्य बहिष्कार, हड़ताल शुरू कर देते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी समन्वय समिति की नहीं होगी।

बैठक में अध्यक्ष जितेंद्र सिंह देव के अलावा महामंत्री विजय खाली, अरविंद सिंह सजवाण, सौरभ शर्मा, रामकुमार, अजय बेलवाल, गौरव बर्त्वाल, आरके रोनिवाल, गिरीश चंद्र द्विवेदी, नरेंद्र पाल, सुदामा प्रसाद, लक्ष्मी नारायण भट्ट, अनिल कुमार शर्मा समेत समस्त घटक संघों, निगम के समस्त कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष महामंत्री एवं शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहे।

 

122 thoughts on “गुस्से में पेयजल कर्मी, ट्रेजरी से वेतन-पेंशन का शासनादेश जारी न होने पर 28 से बेमियादी अनशन शुरू करने का किया ऐलान

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