उत्तराखंड जल संस्थान में अनियमितता के मामले में दो इंजीनियर सस्पेंड, एक इंजीनियर ने बेटे को दिए कई ठेके

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– जल संस्थान ऊधमसिंहनगर के अधिशासी अभियंता समेत पौड़ी के सहायक अभियन्ता को पद के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता पर किया गया निलंबित

जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। जनपक्ष टुडे की खबर पर शासन ने भी मुहर लगा दी है। अनियमितता से जुड़ी खबर का संज्ञान लेते हुए सचिव पेयजल नितेश झा ने मुख्य महाप्रबंधक एसके शर्मा की संस्तुति पर उत्तराखंड जल संस्थान के दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। इसमें एक अधिशासी अभियंता और एक सहायक अभियंता शामिल है। इसमें एक मामला बेहद गंभीर है, जिसमें उच्चाधिकारियों की मिलीभगत भी बताई जा रही है, लेकिन शासन ने इस मामले में प्रथम दृष्टया सहायक अभियंता को दोषी पाते हुए निलंबित किया है।

पहला मामला उत्तराखंड जल संस्थान उप खंड पौड़ी का है। आरोप है कि पौड़ी सब डिवीजन में कार्यरत सहायक अभियंता राकेश कुमार वर्मा ने बेटे को अपने डिवीजन में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये के ठेके आवंटित किए है। यह कर्मचारी आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। कोई भी अधिकारी अपने परिवार या रिश्तेदार को ठेका नहीं दे सकता है। लेकिन सहायक अभियंता नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बेटे से अपने डिवीजन में लाखों-करोड़ों के पेयजल के कार्य करवाए।

इस मामले का जनपक्ष टुडे ने “अंधेरगर्दी: उत्तराखंड जल संस्थान में सहायक अभियंता ने दिलाए ठेके” नामक शीर्षक से 25 जून 2021 को खुलासा किया था, जिसका विभाग और शासन ने संज्ञान लेकर मामले पर जांच बिठाई। महाप्रबंधक गढ़वाल सुबोध कुमार की जांच में मामला सही पाया गया। जिसके बाद मुख्य महाप्रबंधक एसके शर्मा ने सहायक अभियंता राकेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति की।

मामले को गम्भीर अपराध मानते हुए सचिव पेयजल नितेश कुमार झा ने पद के दुरुपयोग के आरोपी सहायक अभियंता राकेश कुमार को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि निलंबन के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता भी प्रतिबंधों के अधीन दिया जाएगा।

बड़ा सवाल यह है कि सहायक अभियंता के बेटे का सम्बंधित सर्किल में कैसे ठेकेदारी का लाइसेंस बन गया। यह सवाल यक्ष प्रश्न बन गया है। तब सम्बंधित अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और महाप्रबंधक गढ़वाल क्या कर रहे थे। क्या उक्त अधिकारियों ने अपने दायित्यों का पूरी तरह से निर्वहन किया है। नहीं किया तो क्या इन पर भी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। विभागीय सूत्रों की मानें तो यदि मामले की बाहरी एजेंसी से जांच कराई जाए, तो कई औरों की संलिप्तता उजागर हो सकती है। इस मामले के उजागर होने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कई अन्य अधिकारियों ने भी इस तरह अपने परिवार और निजी रिश्तेदारों को विभाग में कार्य आवंटित किए होंगे, जिसका जांच के बाद चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

दूसरा मामला जल संस्थान के ऊधमसिंहनगर का है, जहां अधिशासी अभियन्ता तरुण शर्मा को भी कर्मचारी आचार नियमावली के उल्लंघन के आरोप में निलंबित किया गया है। बताया जा रहा है कि तरुण शर्मा मेडिकल छुट्टी पर थे। बीच मे आकर उन्होंने बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के स्वतः ही कार्यभार ग्रहण कर लिया। इस प्रकरण को भी गम्भीर अनुशासनहीनता मानते हुए सचिव पेयजल ने तरुण शर्मा को भी सस्पेंड कर आदेश जारी कर दिए हैं।

पूर्व में प्रकाशित खबर

अनियमितता पर बख्शे नहीं जाएंगे: शर्मा

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके शर्मा ने दोनों अभियन्ताओं के निलंबन की पुष्टि करते हुए कहा कि नियम विरुद्ध कार्य करने पर किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। इस सम्बंध में पूर्व में बि हिदायतें दी जा चुकी है। योजनाओं के निर्माण में किसी भी तरह की अनियमितता और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी अभियन्ताओं की जबावदेही फिक्स है। इसके बाद भी कोई सिस्टम को ब्रेक करने का प्रयास  करता है, तो उसे कतई माफ नहीं किया जाएगा।

ये है पौड़ी डिवीजन का पूरा मामला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी जल जीवन मिशन हर घर नल, हर घर पानी की योजना के तहत पूरे प्रदेश में पेयजल लाइनें बिछाई जा रही है। इसके लिए ठेकेदारों को कार्य आवंटित किए गए, लेकिन कई अधिकारी रिश्तेदारों और परिवार के लोगों को ही काम दे दिया।

जल संस्थान के पौड़ी सब डिवीजन में नियमों की परवाह किए बगैर एक सहायक अभियंता ने बेटे का 2020 में ठेकेदारी का लाईसेंस बनवाया। फिर उसे अपने ही अधीन लाखों-करोड़ों के कार्य आवंटित कर दिए। पहले तो आरोपी सहायक अभियंता राकेश कुमार वर्मा ने बेटे अपूर्व वर्मा का विभाग में जल जीवन मिशन के तहत ‘डी’ श्रेणी में रजिस्ट्रेशन कराया। बाद में उसे अपने ही डिवीजन में लाखों के कार्य आवंटित किए।

सहायक अभियंता ने बेटे को ठेके दिलाने में ही सांठ-गांठ नहीं की, बल्कि बेटे को आवंटित कार्य अपने सुपरविजन में ही संपन्न कराए। पौड़ी जिले के पोखड़ा और एकेश्ववर ब्लाक में जल जीवन मिशन के तहत लाखों-करोड़ों के पाइप लाइन के काम बेटे से कराए। काम कैसा होगा, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है। जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का। कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

जो व्यक्ति कर्मचारी आचार संहिता का उल्लंघन करने से नहीं डर रहा है, तो वह कैसा काम कराएगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। मांग की जा रही है कि अपूर्व वर्मा के बौंड पर पोखड़ा और एकेश्वर ब्लाक में कराए गए कार्यों की जांच की जाए, जिससे इस खेल का पर्दाफास हो जाएगा। बताया तो यहां तक जा रहा है कि नियमों को ताक पर रख दोनों ब्लाकों में ज्यादातर टेंडर अपूर्ण वर्मा के नाम ही आंवटित कराए गए।

सवाल यह है कि क्या अधिकारी अपने परिवारों को ही ठेके आवंटित करने के लिए ड्यूटी कर रहे हैं। क्या उन्हें नियमों की कोई जानकारी नहीं है। जबकि शासनादेश में स्पष्ट है कि किसी भी अधिकारी- कर्मचारी के ब्लड रिलेशन से जुड़ा कोई भी रिश्तेदार और परिवार का व्यक्ति उस डिपार्टमेंट में ठेके नहीं ले सकता है।

जिस डिपार्टमेंट में वह काम कर रहा है। लेकिन यहां डिपार्टमेंट तो छोड़िए इंजीनियर ने अपने ही डिवीजन में अपने ही अंडर में बेटे के नाम पर ठेके लेकर नियमों को मजाक बनाकर रख दिया।

अभियन्ता ने बेटे को कैसे ठेके आवंटित किए। क्या यह शासनादेश का उल्लंघन नहीं है। क्या यह मिलीभगत का हिस्सा नहीं है। सहायक अभियांता का बेटा डिवीजन में काम कर रहा है और किसी अधिकारी- कर्मचारी को कानों-कान तक खबर नहीं है, ऐसा कैसे हो सकता है।

यदि यह किसी को पता नहीं चला तो यह भी बहुत गैर जिम्मेदाराना और गंभीर बात है। इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को भी दंडित किया जाना चाहिए।

इसकी भी जांच की जानी चाहिए कि डिपार्टमेंट में किस-किस अधिकारी-कर्मचारी के रिश्तेदार काम कर रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि दूसरे डिवीजनों में भी इस तरह के प्रकरण हो सकते हैं। इसलिए इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

सवाल यह भी है कि पिता उसी डिपार्टमेंट में सरकारी सेवक है, तो इसके बाद भी अपूर्व वर्मा का रजिस्टेशन कैसे हो गया। क्या तथ्य छिपाए गए। क्या इसकी जानकारी किसी अधिकारी-कर्मचारी को नहीं थी। ऐसा कदापि संभव नहीं है। यह सब बगैर सांठ-गांठ से नही हो सकता। रजिस्ट्रेशन भी कोई पुराना नहीं है, बल्कि 20 अक्टूबर 2020 का है।

जल जीवन मिशन में रजिस्ट्रेशन कराने में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े की बात भी सामने आ रही है। बहरहाल इस मामले का संज्ञान लेकर उच्चाधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करने चाहिए, ताकि इस तरह से नियम विरूद्ध तरिके से सरकारी धन लूटने में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों पर लगाम लग सके।

 

9 thoughts on “उत्तराखंड जल संस्थान में अनियमितता के मामले में दो इंजीनियर सस्पेंड, एक इंजीनियर ने बेटे को दिए कई ठेके

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