राष्ट्रीय अवकाश के दिन दफ्तर खोलने को ऊर्जा कर्मियों ने बताया तुगलकी फरमान और उत्तराखंड के वित्तीय संशाधनों का दुरुपयोग

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल
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आज गांधी जयंती के दिन विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ऑनलाइन मीटिंग में कई गई आंदोलन कार्यक्रम की समीक्षा

– बैठक की अध्यक्षता इंजीनियर अमित रंजन और संचालन संयोजक इंसारूल हक ने किया

– अवकाश के दिन दफ्तर खोलने के ऊर्जा निगम प्रबधन के आदेश को बताया राज्य के वित्तीय संसाधन का दुरुपयोग

– विद्युत संविदा संगठन के अध्यक्ष विनोद कवि को निगम अधिकारियों द्वारा -बार पड़ताड़ित करने पर आंदोलन को चेताया

– मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से किया गया अनुरोध, निगम प्रबन्धन कर रहा है गुमराह, कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र अपने स्तर से लें सकारात्मक निर्णय

जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा, उत्तराखंड ने ऊर्जा निगम प्रबन्धन के एक आदेश को तानाशाही करार दिया। मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि प्रबन्धन शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे कार्मिकों को उग्र आंदोलन के लिए उकसा रहा है, जिसके परिणाम बड़े दुष्प्रभावी होंगे। उन्होंने चेताया कि ऊर्जा निगम के प्रबन्धन कार्मिकों के सब्र का इम्तिहान न लें। यदि कार्मिकों का गुस्सा बाहर निकलेगा, तो प्रबन्ध तो क्या सरकार भी सम्भाल नहीं पाएगा।

शनिवार को मोर्चा की ऑनलाइन बैठक सम्पन्न हुई। बैठक ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मोर्चा की न्याय पूर्ण समस्याओं को हल करने के लिए किए जा रहे हैं आंदोलन के प्रति दुर्भावना स्वरूप एवं उत्पीड़न की कार्रवाई के रूप में विद्युत संविदा संगठन के अध्यक्ष विनोद कवि को बार-बार व्यक्तिगत तौर पर परेशान करने की निन्दा की गई तथा प्रबंधन को याद दिलाया गया कि मोर्चा के आंदोलन कार्यक्रम में स्पष्ट लिखा है कि किसी भी सदस्य का उत्पीड़न किए जाने की स्थिति में आंदोलन या हड़ताल तत्काल प्रारंभ कर दी जाएगी|

मोर्चा पदाधिकारियों ने 2 अक्टूबर के राष्ट्रीय अवकाश और 3 अक्टूबर को रविवार होने के कारण कार्यालय खोलने के आदेश को वित्तीय संसाधनों की बर्बादी और उत्तराखंड सरकार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ वाला निर्णय बताया गया।

वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड सरकार के पास आर्थिक संसाधनों की कमी है, लेकिन जिस प्रकार के निर्णय विगत एक-दो दिन में लिए गए उनसे स्पष्ट है कि जनता का पैसा बिना वजह खर्च किया जाने के लिए विभिन्न राज्यों से कर्मचारियों की तैनाती एवं अनावश्यक प्रशासनिक दबाव बनाने के हथकंडे पर खर्च किया जा रहा है|

उत्तराखंड के बिजली निगमों के कर्मचारियों की जो समस्याएं हैं उनका कोई भी आर्थिक भार वर्तमान में उत्तराखंड सरकार पर नहीं आना था, लेकिन आंदोलन को दबाने एवं अनावश्यक वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के नाम पर करोड़ों रुपए अनाप-शनाप खर्च किए जा रहे हैं, जो सीधे-सीधे मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री को गुमराह करते हुए किया जा रहा है।

मोर्चा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत से अनुरोध किया गया कि वह समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए इसका समाधान निकालने का प्रयास करें, जिससे राज्य के संसाधन एवं राज्य की मानव शक्ति का औद्योगिक शांति एवं ऊर्जा प्रदेश के हितों के लिए प्रयोग किया जा सके।

बैठक में मोर्चा के संयोजक इंशारुल हक ने अवगत कराया कि राज्य विद्युत संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश, अभियंता संघ तथा उत्तराखंड राज्य कर्मचारी महासंघ के द्वारा मुख्यमंत्री को समस्याओं के समाधान एवं बिजली कर्मचारियों को न्याय दिलाने के लिए पत्राचार कर मोर्चे के आंदोलन को पूर्ण समर्थन प्रदान दिया है।

विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की बैठक में समस्याओं का समाधान वर्ष 2017 और 2021 में किए गए त्रिपक्षीय समझौता में किसी भी समस्या के समाधान को आदेश के रूप में निर्गत न किए जाने तथा कर्मचारियों को मिल रही सेवा शर्तों में रिफॉर्म एक्ट 1999 में किए गए प्रावधान का उल्लंघन करने के कारण हो रहा है|

कर्मचारी नेताओं ने बताया कि रिफॉर्म एक्ट 1999 जो कि भारत की संसद से पारित है, उसमें स्पष्ट वर्णित है कि कर्मचारियों की सेवा शर्तें कमतर नहीं की जा सकती, लेकिन हठधर्मिता एवं निरंकुशता के कारण राज्य के आर्थिक संसाधनों का दुरुपयोग करने के साथ-साथ संसद द्वारा पारित एक्ट का उल्लंघन किया जा रहा है।

मोर्चा ने स्पष्ट किया गया कि जिस प्रकार नेशनल होलीडे एक्ट का उल्लंघन करते हुए 2 अक्टूबर व 3 अक्टूबर के अवकाश को कार्यालय खोलने के लिए आदेश जारी किए गए वह आर्थिक रूप से निगमों को एवं सरकार को बड़ा नुकसान पहुंचाएगा। क्योंकि एक्ट के अनुरूप इन दो दिनों की लिए कर्मचारियों को 1 दिन का अतिरिक्त वेतन का भुगतान निगम को करना पड़ेगा। साथ ही रविवार के दिन कार्यालय खोलने पर 3 दिन के भीतर कंपनसेटरी छुट्टी देनी पड़ेगी।

इससे स्पष्ट है कि वर्तमान प्रबंधन राज्य के बहुमूल्य आर्थिक संसाधनों का दुरुपयोग एक न्याय पूर्ण शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने एवं कुचलने के लिए प्रयोग कर रहा है |

मोर्चा पदाधिकारियों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से अनुरोध किया है कि समय रहते हैं सभी समस्याओं का वार्ता के माध्यम से समाधान किया जाए। न्याय न मिलने तक मोर्चा ने निर्णय लिया कि आंदोलन कार्यक्रम यथावत जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न चरणों में शांतिपूर्ण तरह से समस्याओं के प्रति ध्यानाकर्षण किया जाता रहेगा।

बैठक में हाइड्रोइलेक्ट्रिक एंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष केहर सिंह, उत्तरांचल पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चंद्र पंत, महामंत्री संदीप शर्मा, उत्तरांचल बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ध्यानी, विद्युत संविदा संगठन के महामंत्री मनोज पंत, विद्युत डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज सैनी तथा उप महासचिव भानु प्रकाश जोशी, प्राविधिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुनील मोगा, उत्तरांचल पावर इंजीनियर एसोसिएशन के महासचिव अमित रंजन, पावर लेखा संघ के महामंत्री दिनेश चंद्र ध्यानी, पवन रावत केडी जोशी आनंद सिंह रावत, ऊर्जा कामगार संगठन के कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक बेनीवाल समेत मोर्चा के सभी घटक संघ के अन्य पदाधिकारियों  ने प्रतिभाग किया।

12 thoughts on “राष्ट्रीय अवकाश के दिन दफ्तर खोलने को ऊर्जा कर्मियों ने बताया तुगलकी फरमान और उत्तराखंड के वित्तीय संशाधनों का दुरुपयोग

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