चीनी घोटाले के आरोपी अधिकारी पर मंत्री मेहरबान, बोले विभाग में अनुभवी अधिकारियों की कमी

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जनपक्ष टुडे ब्यूरो, हल्द्वानी। दूसरों को नसीहत देने वाले सरकार के मंत्री और विधायक खुद घपले-घोटालों में संलिप्त अधिकारियों की पैरवी करने में जुटे हैं। नादेही चीनी मिल में अनियमितताओं के मामले में आरके सेठ पर कार्रवाई के बाद विभागीय मंत्री ने आरोपी अधिकारी को उत्तराखंड शुगर मिल का महाप्रबंधक बनाया है।

इस मामले में विभागीय मंत्री स्वामी यतीस्वरानंद का यह बयान किसी के गले नहीं उतर रहा है कि विभाग के पास अभी कोई अनुभवी अधिकारी नहीं है। सितारगंज मिल को चलाने के लिए किसी टेक्निकलअनुभवी अधिकारी की जरूरत थी, लिहाजा आरोपी अधिकारी आरके सेठ को जिम्मेदारी दी गई है।

भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस पर हमले करने वाली भाजपा कितनी ईमानदारी से काम कर रही है उसका यह उदाहरण है। पहले सरकार के मंत्री खुद घोटाले के आरोप में अधिकारियों पर कार्रवाई करते हैं और फिर मेहरबानी करते हुए भी देर नहीं लगाते।

मुख्यमंत्री के सबसे करीबी मंत्रियों में शामिल स्वामी यतीस्वरानंद ने इस शुगर मिल के एक अधिकारी को लेकर जो रोलबैक किया है वह सरकार की जीरो टॉलरेंस की पोल खोलने के लिए काफी है।

बता दें कि मामला ऊधमसिंहनगर जिले के जसपुर में नादेही चीनी मिल का है, जहां 2016 से 2018 के बीच चीनी चोरी घोटाले का बड़ा मामला प्रकाश में आया था। इस घोटाले में तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक आरके सेठ को आरोपी माना गया था। इ

स मामले में ऑडिट जांच के दौरान भारी गड़बड़ियां सामने आई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। इस मामले में तत्कालीन सचिव चंद्रेश कुमार ने न केवल जांच के आदेश जारी किए थे, बल्कि विभागीय मंत्री यतीस्वरानंद भी ऐसे अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

सरकार ने इस अधिकारी को पहले पद से हटाया और बाद में तत्कालीन सचिव चंद्रेश यादव ने जांच शुरू की, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पहले तो सरकार ने जांच अधिकारी को चंद्रेश यादव को ही हटा दिया और कुछ दिन बाद आरोपी अधिकारी को वापसी करा दी।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस आरोपी अधिकारी के खिलाफ जांच चल रही है उसे ऐसे पद पर बिठाकर न केवल जांच प्रभावित करवाई जा रही है, बल्कि भविष्य में ऐसे अधिकारियों को गलत संदेश भी दिया जा रहा है। हालांकि विपक्ष भी भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर मौन साढ़े हुए है। इधर, अभी इस मामले में जांच आनी बाकी है। जांच के बाद सरकार क्या कदम उठाती वह देखने वाली बात होगी।

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