राजनीति: लंबे जद्दोजहद के बाद आखिरकार कांग्रेस के हो गए हरक सिंह, कांग्रेस मुख्यालय में आतिशबाजी कर कार्यकर्ताओं मानाया जश्न

उत्तराखंड राजनीति विधानसभा चुनाव 2022
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जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। आखिरकार लम्बे जद्दोजहद के बाद हरक सिंह की घर वापसी हो गई है। तमाम ना नुकुर के बाद कॉंग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने सब कुछ भुला कर उन्हें अपना ही लिया है। भाजपा से 6 साल के लिए निष्कासित किए गए हरक सिंह रावत ने बहू अनुकृति के साथ आज नई दिल्ली में कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मौजूद रहे।

बता दें कि बीते सप्ताह हरक सिंह रावत को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए भाजपा ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था। जिसके बाद से हरक सिंह रावत की कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थी। हांलांकि कांग्रेस पार्टी में कुछ नेताओं द्वारा उन्हें शामिल करने का विरोध किया जा रहा था। वहीं एक घूंट उन्हें शामिल करने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी व राहुल गांधी की हरी झंडी के बाद हरक सिंह रावत अपनी बहू अनुकृति गुसाईं के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए।

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह से लेकर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदिया का मानना है कि हरक सिंह रावत के पार्टी में शामिल होने से गढ़वाल क्षेत्र में कांग्रेस मजबूत होगी। सूत्रों की मानें तो हरक सिंह की केवल एक टिकट की शर्त पर कांग्रेस में वापसी हुई है। पार्टी से या तो हरक सिंह रावत को या फिर उनकी बहू को टिकट मिल सकता है। हरक सिंह रावत के कांग्रेस में शामिल होने पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, देहरादून में खूब आतिशबाजी और नारेबाजी हुई।

उत्तराखंड की राजनीति में हरक सिंह एक बड़े नेता माने जाते हैं। हालांकि उन पर भ्रष्टाचार के हमेशा आरोप लगते रहे हैं। उत्तराखंड में हुए चार विधानसभा चुनाव में अलग-अलग सीटों और पार्टियों है वह जीत दर्ज कर चुके हैं। 2002 और 2007 में लैंसडाउन सीट से, 2012 में रुद्रप्रयाग तथा 2017 में बीजेपी के टिकट से कोटद्वार में चुनाव जीते थे और उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे।

 

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