मुख्यमंत्री धामी ने इंजीनियरों को बताया विश्कर्मा, बोले, प्रदेश के विकास में अभियंताओं का सबसे बड़ा योगदान

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– मुख्यमंत्री धामी बोले, इंजीनियरों की समस्याओं के जल्द निराकरण के लिए गठित होगी समाधान समिति 

– उत्तराखंड डिप्लोमा इंजिनियर्स महासंघ का दो दिवसीय एकादश महाधिवेशन सम्पन्न

– अधिवेशन में संगठन के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले पदाधिकारियों के साथ ही वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों को स्मृति चिन्ह के साथ शॉल ओढ़ाकर किया गया सम्मानित 

जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दून विश्व विद्यालय रोड स्थित निरंजन फार्म में उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के एकादश अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कहा कि इस अधिवेशन में मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह कार्य के प्रति सभी लोगों को प्रेरणा देगा और नई ऊर्जा का संचार करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने विभिन्न बिन्दुओं की जो मांग रखी है, उन मांगों का समाधान करने का हर संभव प्रयास किया जायेगा। उन्होंने अपर मुख्य सचिव आनन्दवर्द्धन को निर्देश दिए कि वार्ता कर डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पदाधिकारी सभी समस्याओं से जल्द अवगत कराएं, ताकि जिन समस्याओं का जल्द से जल्द निराकरण हो सकता है, उन्हें शीघ्रता से निस्तारित करने की प्रकिया शुरू की जा सके।

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की मांग के लिए राज्य आन्दोलनकारियों ने बहुत संघर्ष किया है। राज्य आन्दोलनकारियों के सपनों के अनुरूप प्रदेश के विकास के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे। उत्तराखण्ड एक युवा राज्य है। वर्ष 2025 में जब हम उत्तराखण्ड राज्य की रजत जयंती मनायेंगे, उस समय उत्तराखण्ड हर क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में होगा।

उत्तराखण्ड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने की हमारे समक्ष चुनौती है। इसके लिए सरकार द्वारा हर प्रयास किये जा रहे हैं। जन सहयोग एवं जन भागीदारी से उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में सभी वर्गों के लोगों ने जन सेवा के लिए अपने आप को झौंकने का सराहनीय कार्य किया।

समाधान समिति की सिफारिश पर होगा जल्द सर्जल्ड समस्याओं का निराकरण

उत्तराखंड में डिप्लोमा इंजीनियर्स की मांगों के निस्तारण को समाधान समिति का गठन होगा। समिति की सिफारिश पर बिंदुवार समस्याओं को निस्तारित करने का प्रयास किया जाएगा। डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ के महाधिवेशन में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मांग पत्र में शामिल सभी मांगों के निस्तारण का जकड़ निराकरण करने का भी विश्वास की दिलाया। सीएम धामी ने अभियांत्रिकी को विश्वकर्मा की संज्ञा देते हुए कहा कि प्रदेश के निर्माण में इंजीनियरों का विशेष योगदान है। उन्होंने इंजीनियरों से उत्तराखंड के विकास में और तेज गति से काम करने की अपील की है।

इंजीनियरों की समस्याओं के निराकरण के बिना सरकार की संकल्पना पूरी होना सम्भव नहीं: बेलवाल

इस दौरान महासंघ के प्रांतीय महासचिव अजय बेलवाल ने मुख्यमंत्री के समक्ष 19 सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि न्यायोचित मांगों के लिए भी इंजीनियरों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है, जो प्रदेश के हित में कदापि उचित नहीं है। इससे विकास कार्य भी कई बार प्रभावित होते हैं। इसलिए शासन और सरकार को इंजीनियरों की जायज मांगों का अतिशीघ्रत से निदान करना चाहिए। बेलवाल ने कहा कि छोटी-छोटी मांगों के लिए भी उन्हें बार-बार शासन और विभागीय उच्चाधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जो बेहद कष्टदेह होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि सरकार इंजीनियरों की समस्याओं का समाधान करेगी तो वह भी उत्तराखंड को देश का नम्बर 1 राज्य बनाने के सरकार के संकल्प को पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

जायज मांगों के लिए लगातार संघर्ष करने के बाद भी समाधान न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण: नौटियाल

इस अवसर पर महासंघ के प्रान्तीय अध्यक्ष हरीश चन्द्र नौटियाल ने कहा कि सरकार, शासन एवं समाज के जिम्मेदार व्यक्ति डिप्लोमा इंजीनियर्स की विभिन्न निर्माण कार्यों में उनकी भूमिका को सदैव निर्माण कार्यों में रीढ़ के रूप में रेखांकित तो करते हैं, लेकिन तमाम परिस्थितियों में राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित इन शिल्पियों के समक्ष आने वाली विकट समस्याओं के निस्तारण को इन्हें हमेशा संघर्ष ही करना पड़ता है। विभिन्न अभियान्त्रिकी कार्यो के विशेषज्ञों के इस संवंग का राज्य गठन के पश्चात् लगातार अवमूल्यन करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्रदेश के इंजीनियरों में भारी असंतोष है, जिसका असर निर्माण कार्यों पर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रदेश के विकास के साथ -साथ इंजीनियरों की समस्याओं के समाधान पर भी विशेष ध्यान देने का अनुरोध किया है।

सड़कों के जो गड्ढे नेताओं को दिखते हैं वह इंजीनियरों को क्यों नहीं दिखते?

अधिवेशन में विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद विधायक विनोद चमोली ने एक ओर इंजीनियरों की मांगों की वकालत की। वहीं दूसरी ओर उन्हें खरी-खरी भी सुनाई। चमोली ने कहा कि नए पुल बनते ही टूट जाते हैं। सड़कें चार दिन में उखड़ने लगती हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मौके पर काम मुंशी के भरोसे छोड़ दिया जाता है। सड़कों के जो गड्ढे नेताओं को नजर आते हैं, वे इंजीनियरों को क्यों नजर नहीं आते। ऐसे में आने वाला दशक कैसे उत्तराखंड का होगा।

अधिवेशन में ये रहे मुख्य रूप से मौजूद 

डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष डीसी नौटियाल, नवीन कांडपाल, मुख्य संयोजक यूएस महर, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोनिवि के प्रांतीय अध्यक्ष आरएस मेहरा, प्रांतीय महासचिव एसएस चौहान, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ पेयजल निगम के प्रांतीय अध्यक्ष रामकुमार, प्रांतीय उपाध्यक्ष अरविंद सजवाण, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ सिंचाई विभाग के अध्यक्ष बीएस डांगी, महासचिव अनिल पंवार, डिप्लोमा इंजीनियर संघ जल संस्थान के प्रांतीय महासचिव जयपाल सिंह चौहान,  सुधीर पंवार, अरुण पांडे, गंगा सिंह चुफाल, एके ध्यानी, शक्ति प्रसाद भट्ट, बीडी बेंजवाल, रमेश चन्द्र शर्मा, मुकेश रतूड़ी, वीरेंद्र गुसाई, शक्ति आर्य, ओमजी गुप्ता, प्रताप पंवार, पीसी जोशी, केसी उनियाल, शिवराज लोधी, अरविंद प्रताप सिंह, प्रशांत सेमवाल और नीरज शर्मा समेत बड़ी संख्या में प्रदेशभर से आए इंजीनियर मौजूद रहे।

महासंघ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सौंपा 19 सूत्रीय मांग पत्र, धामी बोले बिन्दुवार होगा समस्याओं का समाधान

1. उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की मांगो / समस्याओं के सन्दर्भ में मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन की अध्यक्षता में 17-12-2015 एवं 10-11-2016 को सम्पन्न बैठकों के कार्यवृत्त के अनुरूप निर्णीत बिन्दुओं पर तुरन्त शासनादेश निर्गत किये जाय।

(क) निगम / परिषद् / संस्थान / स्थानीय निकाय / प्राधिकरण में कार्यरत डिप्लोमा इंजीनियर्स को शासकीय विभागों के अनुरूप वेतनमान एवं अन्य सुविधाएँ प्रदान किये जाने हेतु शासनादेश जारी किया जाय।

(ख) (i) डिप्लोमा इंजीनियर्स को देय वाहन भत्तों की दरों का पुनरीक्षण किया जाय।

(ii) समूह ख के राजपत्रित अभियन्ताओं / अधिकारियों को कार अनुरक्षण भत्ता अनुमन्य कराया जाय।

(ग) स्थानान्तरण अधिनियम 2018 में महासंघ द्वारा प्रेषित सुझावों के अनुरूप संशोधन किया जाय।

(घ) समस्त विभागों के क० अभियन्ता / अ०स० अभियन्ता / सहायक अभियन्ता / अधि० अभियन्ताओं हेतु कार्मिक विभाग से एक ही सेवानियमावली प्रख्यापित की जाय।

(ङ) महासंघ एवं शासन के मध्य वर्ष 2011 में सम्पन्न समझौते के अनुसार सीधी भर्ती के रिक्त पदो पर प्रभारी सहायक अभियन्ताओं की नियुक्ति की जाय उक्त समझौते का ग्रामीण निर्माण विभाग, पेयजल विभाग, कृषि विपणन बोर्ड एवं कृषि विभाग आदि में तत्काल अनुपालन सुनिश्चित कराये जाए।

2. पूर्व की भांति डिप्लोमा इंजीनियर सवंर्ग की समस्याओं के समाधान को डिप्लोमा इंजीनियर्स समस्या समाधान समिति का गठन किया जाय।

3. प्रदेश के कार्मिको के लिए 1 अक्टूबर 2005 से लागू अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) बहाल की जाय। समयमान वेतनमान / ए०सी०पी० / एम०ए०सी०पी० / सेवानिवृत्ति लाभों के अन्तर्गत अनुमन्यता हेतु कार्मिक द्वारा की गयी

4. तदर्थ सेवाओं की अवधि की गणना किये जाने हेतु स्पष्ट आदेश निर्गत किये जाये।

5. उत्तराखण्ड पेयजल निगम एंव उत्तराखण्ड जल संस्थान का राजकीयकरण करते हुए एकीकरण किया जाय।

6. समस्त अभियन्त्रांकी विभागों में एक समान सेवानियमावली का प्रख्यापन करते हुए पदोन्नति की पात्रता के अनुसार पूर्व की भांति तीन पदोन्नत वेतनमान अनिवार्य रूप से स्वीकृत किया जायें।

7. पदोन्नति में ठहराव की समस्या के निराकरण हेतु सहायक अभियन्ता एवं उच्च स्तरीय पदों पर डिप्लोमा इंजीनियर्स की पदोन्नति के लिए समानान्तर गैलेरी का सृजन किया जाय।

8. प्रदेश के समस्त सेवारत एवं सेवानिवृत्त कार्मिकों के लिए राज्य स्वास्थ्य योजना (SGHS) में आवश्यक संशोधन करते हुए केन्द्र सरकार की भांति लागू किया जाए।

9. पी०एम०जी०एस०वाई० खण्डो के लिए लो0नि0वि0 के पूर्व में स्वीकृत रहे संवर्गीय पदो को पुनर्जीवित कर पूर्व की भांति सरकार की भांति तत्काल लागू की जाय

10. कतिपय अभियन्त्रण विभागों में तीन वर्ष की सेवा के उपरान्त अपर सहायक अभियन्ता का पदनाम एवं वेतन वर्तमान तक संवर्गीय किया जाय अनुमन्य नहीं किया गया है। उन विभागों में तत्सम्बन्धी पदनाम एवं वेतन, देय तिथि से लाभ हेतु यथोचित शासनादेश निर्गत किया जाय।

11. प्रदेश के कार्मिकों को अहंकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्ववर्ती व्यवस्था लागू रखी जाय।

12. के शासनादेश संख्या 452/XXXII(1)/ 2005 दि0 05-04-2005 को सख्ती से लागू करते हुए प्रदेश से बाहर की एजेन्सियों को प्रदेश में निर्माण कार्य देने पर अंकुश लगाया जाय।

13. कृषि विभाग एवं जिला पंचायत में भी अन्य समस्त अभियन्त्रण विभागों की भांति सहायक अभियन्ता, अधिशासी अभियन्ता एवं अधीक्षण अभियन्ता यथोचित पद सृजित किये जाय ताकि विभागार्न्तगत निर्माण कार्यो में आ रही तकनीकी समस्याओं का समाधान हो सके।

14. तकनीकी कार्यों में राजनैतिक एवं प्रशासनिक हस्तक्षेप रोका जाये एवं निर्माण की जांच कार्यों के सम्पादन के दौरान ही तकनीकी विभागों / टी०ए०सी० से करायी जाय।

15. वर्तमान में डिoइं० संवर्ग से सम्बन्धित शासन के वित्त एवं कार्मिक विभाग द्वारा जारी होने वाले शासनादेशों को समस्त विभागों हेतु लागू किये जाय। वर्तमान में वित्त एवं कार्मिक विभागों के शासनादेशों के पश्चात् प्रशासनिक विभागों द्वारा अलग-अलग शासनादेश जारी किये जा रहे है। इस व्यवस्था पर अंकुश लगाया जाय।

16. विभिन्न विभागों में कार्यरत् डिप्लोमा इंजीनियर्स को निगम / परिषद् / संस्थान / स्थानीय निकाय / प्राधिकरण में पूर्व में की गई सेवाओं का ए०सी०पी० / प्रोन्नत वेतनमान में लाभ दिया जाय।

17. सहायक अभियन्ता राजपत्रित श्रेणी के अपर सहायक अभियन्ता के नियन्त्रक अधिकारी का पद है। इसलिए सहायक अभियन्ता पद पर संविदा / आउटसोर्सिंग नियुक्ति कदापि न की जाय एवं वर्तमान में संविदा/ आउटसोर्स आधार पर नियुक्ति सहायक अभियन्ताओं को तत्काल सेवा से हटाया जाय।

18 समस्त अभियन्त्रण विभागों में कनिष्ठ अभियन्ता/अपर सहायक अभियन्ता से सहायक अभियन्ता पद पर प्रोन्नति के लिए न्यूनतम तकनीकी योग्यता सम्बन्धित शाखा में त्रिवर्षीय अभियन्त्रण डिप्लोमा निर्धारित की जाय।

19. विभिन्न विभागो में कनिष्ठ अभियन्ता से लेकर मुख्य अभियन्ता तक दायित्वों का निर्धारण करते हुए न्यायसंगत जॉब चार्ट बनाया जाय।

 

5 thoughts on “मुख्यमंत्री धामी ने इंजीनियरों को बताया विश्कर्मा, बोले, प्रदेश के विकास में अभियंताओं का सबसे बड़ा योगदान

  1. 5-10 mg 3-4 times a day, dose to be taken 15
    minutes before feeds. Child 2-11 years 10 mg 3 times a day.
    Child 12-17 years 10-20 mg 3 times a day. Adult 10-20 mg
    3 times a day. Contra-indications For all antimuscarinics (systemic).

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