सिंचाई विभाग में बह रही उल्टी गंगा, सबसे कनिष्ठ अभियंताओं को बनाया सहायक अभियंता

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– गुस्साए अभियंताओं ने आदेश निरस्त न करने पर 27 अप्रैल को प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष का घेराव करने को चेताया
जनपक्ष टुडे ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड सिंचाई विभाग में उल्टी गंगा बह रही वरिष्ठता विभागीय वरिष्ठता नियमावली को दरकिनार करते हुए सबसे कनिष्ठ दो अभियंताओं को प्रभारी सहायक अभियंता बनाया है। कार्य दायित्व देने का विभाग का यह रवैया तानाषाहीपूर्ण बताया जा रहा है। दरअसल जिन दो अभियंताओं के लिए सारे कायदे-कानून तोड़े गए वह इस पद के लिए पात्र ही नहीं हैं। और तो और सीनियरिटी लिस्ट में भी वह सबसे आखिरी में है।
अभियंताओं का आरोप है कि यदि विभाग को सहायक अभियंताओं की इतनी ही जरुरत थी, तो वरिष्ठता के आधार पर जो अभियंता सिनियरिटी में सबसे उपर हैं, उन्हें प्रमोट किया जाना चाहिए था, लेकिन विभाग ने मनमानी चलाकर सीनियर कनिष्ठ अभियंताओं के उपर कनिष्ठ अभियंताओं को बिठाकर न केवल नियमावली का उल्लंघन किया है, बल्कि अभियंताओं के मनोबल को भी तोड़ा है। इस आदेश के बाद अभियंताओं में काफी आक्रोश है। अभियंता संघ ने इस मामले में 27 अप्रैल को विभागाध्यक्ष का घेराव करने तक की चेतावनी है।
बता दें कि सचिव सिंचाई हरीश चंद्र सेमवाल ने 28 मार्च 2022 को दो कनिष्ठ जूनियर इंजीनियर दीपक कुमार सिंह और प्रदीप सिंह नेगी को प्रभारी सहायक अभियंता बनाने के आदेष जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि ये दोनों अभियंता जिन्हें उच्च पदों की जिम्मेदारी दी गई है वह वरिष्ठता सूची में सबसे आखिरी में हैं। इनका वरिष्ठता क्रमांक 535 और 687 है। दीपक कुमार से उपर 160 और प्रदीप सिंह नेगी के उपर 300 अभियंता हैं। ऐसे में वरिष्ठता सूची के आखिरी में पांत के अभियंताओं को कैसे प्रमोट किया गया।
बगैर विभागीय प्रस्ताव के ही शासन ने कर दिए आदेश
उत्तराखंड में यह पहला मामला है जब बिना विभागीय प्रस्ताव के शासन ने सीधे प्रभारी सहायक अभियंताओं के आदेश किये हैं। बताया जा रहा है कि विभाग ने कोई प्रस्वाव इस सम्बन्ध में शासन को नहीं भेजा है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि जब विभाग ने कोई डिमांड शासन को इस सम्बंध में की ही नहीं है तो शासन ने सीधे आदेश किस आधार पर किए। दूसरा यह कि जब आदेश जारी किए तो तब वरिष्ठता मामले को संज्ञान में क्यों नही निलय गया। अब मामले में छिछेलेदारी होने पर जहां विभाग बच रहा है वहीं शासन संघ द्वारा अवगत कराएं जाने के बाद आदेश को निरस्त करने की बात कर रहा है। बगैर जांच परख के इस तरह के आदेश करने से शासन की विश्वसनीयता और प्रणाली सवालों के घेरे में है।
अभियंता संघ ने की नियम विरुद्ध आदेश निरस्त करने की मांग, 27 को मुख्यालय में करेंगे प्रदर्शन

शासन द्वारा दो कनिष्ठ अभियंताओं को नियम विरुद्ध बनाए गए प्रभारी असिस्टेंट इंजीनियरों को लेकर अभियंताओं में भारी आक्रोष है। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, सिंचाई विभाग ने इस आदेष को निरस्त न करने पर 27 अप्रैल को विभागाध्यक्ष कार्यालय पर विरोध-प्रदर्षन की चेतावनी दी है। संघ के प्रांतीय महामंत्री अनिल पंवार ने कहा कि लगातार मांग के बावजूद शासन इन नियम विरुद्ध नियुक्तियों के आदेश निरस्त नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अभियंताओं की 6 अन्य मांगों को लेकर 27 को सिंचाई मुख्यालय में प्रदर्षन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 6 रिटायर्ड अधिष्ठ अभियंताओं को उनकी 10 साल की सेवा पूर्ण करने पर उन्हें प्रथम एसीपी 5400 ग्रेड पे का लाभ न दिए जाने के साथ ही 2013 में नियुक्त कुछ कनिष्ठ अभियंताओं को अभी तक अपर सहायक अभियंता का लाभ न दिए जाने को लेकर प्रमुख अभियंता का घेराव किया जाएगा। इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को बड़े स्तर से आयोजित किया जाएगा।

” यह आदेश शासन स्तर से हुए हैं। यदि किसी तरह की कोई सीनियरिटी का मामला है तो  इसमें अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। इस सम्बंध में शासन को अवगत कराया जा रहा है। आदेश को निरस्त करने के लिए सचिव सिंचाई को पत्रावली भेजी जा रही है। ” मुकेश मोहन, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष, सिंचाई विभाग

” संज्ञान में आया है कि प्रभारी सहायक अभियंता गलत बनाए गए हैं। ये अभियंता सीनियरिटी लिस्ट में सबसे कनिष्ठ बताए जा रहे हैं, जिसके बाद इस आदेश को निरस्त करने के आर्डर जारी कर दिए गए हैं। ” हरीश चंद्र सेमवाल, सिंचाई सचिव, उत्तराखंड

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