उत्तराखंड में भाजपा के दिग्गज नेता निशंक और त्रिवेंद्र चुनाव से दूर क्यों, कई तरह की चर्चाएं तेज

उत्तराखंड राजनीति विधानसभा चुनाव 2022
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जनपक्ष टुडे संवाददाता, देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक अपनी-अपनी सीटों पर उलझे हुए हैं। मतदान की नजदीकियां बढ़ रही हैं। अब भाजपा का प्रचार अभियान देखते तो ‘कख रेगी नीति, कख रेग्ये माणा, श्याम सिंह पटवरी कख-कख जाणा’ वाली स्थिति नजर आ रही है।

कांग्रेस के पास हरीश रावत जैसा बड़ा चेहरा चुनाव प्रचार के लिए है और हरीश रावत कर भी रहे हैं लेकिन भाजपा ने स्थानीय स्तर पर किसी को भी जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। हरिद्वार सांसद डा. रमेश पोखरियाल निशंक उत्तराखंड की राजनीति के माहिर माने जाते हैं लेकिन दिल्ली से देहरादून लौटने के बाद वे बैक फुट है। अगुवाई के लिए नेता तो चाहिए ही लेकिन निशंक जैसे नेता को दृष्टि पत्र तक सीमित रखने को लेकर सब कुछ समझ से पार नजर आ रहा है।

संघ के नजदीकी और संगठन के लिए उम्र के इस पड़ाव तक लगातार कार्य करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत भी किसी बड़े कार्यक्रम में नजर नहीं आ रहे हैं। आज रविवार को भाजपा ने चुनाव का थीम गीत व बैनर लांच किया लेकिन इसमें भी निंशक और त्रिवेंद्र अनुपस्थित रहे। त्रिवेंद्र पहले ही साफ कर चुके थे कि उन्हें टिकट नहीं चाहिए और वे पार्टी के लिए कार्य करेंगे।

तब लग रहा था कि त्रिवेंद्र अब विधानसभा चुनाव में अहम रोल निभाने वाले हैं लेकिन हो इसका बिल्कुल उलट रहा है। वे भी तमाम कार्यक्रमों से नदारद है। एक बार और मानी जा सकती है कि अब कुमांऊ पर ही नजर दौड़ाए तो खटीमा कुमाऊं का मैदानी क्षेत्र है और पहाड़ी क्षेत्रों में पुष्कर सिंह धामी की पकड़ भी नहीं है लेकिन यहां भी भाजपा ने पूरा मैदान खाली छोड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री धामी गढ़वाल के चिन्यालीसौड़ आदि जगह पर डोर-टू-डोर संपर्क कर रहे हैं, जबकि गढ़वाल में निशंक और त्रिवेंद्र को वोट मांगने चाहिए। ये दोनों क्षेत्रों और लोगों से भी परिचित हैं। बावजूद इसके उन्हें तमाम कार्यक्रमों से दूर रखना और प्रचार के लिए अकेले धामी का जाने पर भी भाजपा के साथ राजनीति की समझ रखने वाले चर्चा कर रहे हैं। इससे यही साफ हो रहा है कि निशंक और त्रिवेंद्र को भाजपा किनारा रखना चाहती है।

कांग्रेस के लिए खुला मैदान छोड़ने की असल वजह क्या है। चाहे कितना भी छुपा लो, लेकिन वक्त सभी पर्दे हटा देता है जल्द ही यह भी सामने आएगा। त्रिवेंद्र तो शायद दिखाई भी नहीं देते, लेकिन भला हो कि पार्टी ने बृजभूषण गैरोला को टिकट दे दिया अब वे डोईवाला में बृजभूषण के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं, परिणाम भी अच्छे ही होंगे।

 

303 thoughts on “उत्तराखंड में भाजपा के दिग्गज नेता निशंक और त्रिवेंद्र चुनाव से दूर क्यों, कई तरह की चर्चाएं तेज

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