लॉकडाउन के दौरान कार्मिकों को दफ्तर बुलाने का कड़ा विरोध, आवश्यक सेवा में जुटे कार्मिकों को 50 लाख बीमे की मांग

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देहरादून। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में को विभाजित कर्फ्यू के बावजूद राज्य कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने पर कड़ा रोष व्यक्त किया है।

आज कक्षा आयोजित राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की हाई पावर कोर कमेटी की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि देहरादून में ही राज्य और केंद्र सरकार के अधिकांश कार्यालय है। कर्मचारियों को उपकरणों में बुलाने से इन स्थानों पर को विभाजित के फैलने की आशंका है।

वक्ताओं ने कहा कि देहरादून और आसपास के अस्पतालों में गंभीर रोगियों के लिए स्थान नहीं मिल रहा है। यदि कर्मचारी भी तारों में निष्क्रिय हो गए तो स्थित को संभालना असंभव हो जाएगा।

बैठक में इस बात पर भी रोष व्यक्त किया गया कि जनवरी से कर्मचारियों और पेंशन धारकों से गोल्डन कार्ड की कटौती शुरू कर दी गई है, लेकिन कार्ड का कोई भी लाभ कर्मचारियों और पेंशनरों को नहीं मिल रहा है। यहां तक ​​की वह अस्पताल भी इलाज करने से मना कर रहे हैं जिन की सूची राज्य स्वास्थ्य उन्मूलन द्वारा जारी की गई है।

परिषद ने मांग की है कि या तो गोल्डन कार्ड की व्यवस्था तत्काल की जाए अन्यथा अप्रैल के वेतन से गोल्डन कार्ड की कटौती बंद कर दी जाए। बैठक में यह भी मांग की गई कि राज्य के उन कर्मचारियों को 50 लाख के बीमे का कवर प्रदान किया जाए जो कि आवश्यक सेवा में काम रहे हैं।

बैठक में मुख्यमंत्री से यह मांग की गई कि कोविड-19 संक्रमण के दृष्टिगत प्रदेश के समस्त राज्य के राजकीय कार्यालय कम से कम 10 दिन के लिए बंद किए जाएं। वैज्ञानिक आधार पर यह तथ्य स्थापित हुआ है कि कॉविड का संक्रमण 14 दिन के बाद ही नीचे आना शुरू होता है। इस तथ्य के दृष्टिगत कम से कम 14 दिन लगातार कार्यालय बंद रखे जाने पर ही इस चेन को तोड़ा जा सकेगा ।

बैठक में परिषद के अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह, एनके त्रिपाठी, कार्यकारी महामंत्री अरुण कुमार पांडे, एसपी भट्ट, जगमोहन नेगी, गुड्डी मतुरा, आरपी जोशी, गिरिजेश कुंडपाल, तनुवीर अहमद, पीके शर्मा, ओमवीर सिंह, इंद्र मोहन कोठारी, हर्ष मोहन नेगी के साथ मुलाकात की। कुंवर सामंत और बब्बू खान आदि कर्मचारी नेताओं ने भाग लिया |

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