भाजपा में मचे बवाल पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने ली चुटकी, कहा, केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों टीएसआर को चौराहे पर ला छोड़ा

उत्तराखंड राजनीति
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देहरादून। उत्तराखंड में पूर्ण बहुमत के बावजूद भाजपा के लिए राजनीतिक संकट बना हुआ है। डबल इंजन की सरकार ने उत्तराखंड को तीन-तीन मुख्यमंत्री बदल दिए हैं। इससे न सिर्फ राज्य को गम्भीर आर्थिक नुकसान हुआ है। साथ ही यह भी सच हो गया है कि पूर्ण बहुमत से जिताने के बाद देने के बाद भी राजनीतिक स्थिरता की गारंटी नहीं है।

उधर, तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने कहा कि दोनों टीएसआर यानी त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत भले आदमी हैं, लेकिन भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों को चौराहे पर ला छोड़ा है।
हरीश रावत ने कहा कि इससे बड़ा झूठ क्या हो सकता है कि कोरोना संक्रमण की वजह से उपचुनाव नहीं हो सकते और संविधानिक बाध्यता के कारण मुख्यमंत्री इस्तीफा दे रहे हैं। वास्तविकता यह है इसी कोरोना काल में सल्ट में भी उपचुनाव हुआ। मुख्यमंत्री वहां से भी चुनाव लड़ सकते थे।

कहीं और से किसी विधायक का इस्तीफा करवाकर भी चुनाव लड़ सकते थे। कानून की पूरी जानकारी न होने और मुगालते में रहने के कारण राज्य के ऊपर एक और मुख्यमंत्री थोप दिया गया। पांच साल में भाजपा तीन मुख्यमंत्री उत्तराखंड को दे रही है।

उत्तराखंड भाजपा ने अपने दो नेताओं की स्थिति हास्यास्पद कर दी। दोनों ही भले आदमी हैं। त्रिवेंद्र को बजट सत्र के बीच में बदलने का निर्णय लिया गया। तीरथ सिंह की स्थिति उनके अपने बायानों ने और बचीखुची कसर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उनके चुनाव लड़ने के निर्णय पर फैसला ने लेने के कारण हास्यास्पद बन गई।

दोनों अब मजाक के पात्र बनकर रह गए। लोग कह रहे हैं, जब हमारे मुख्यमंत्री को इसी बात का ज्ञान नहीं था कि मुझे कब चुनाव लड़कर विधानसभा में पहुंचना है तो यह व्यक्ति हमारा क्या कल्याण करेगा।

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