ब्लैक मार्केटिंग पर रोक: अब अस्पतालों को सीएमओ दफ्तर से जारी होंगे ब्लैक फंगस के इंजेक्शन

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देहरादून। रेमडेसिविर के बाद ब्लैक फंगस के एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की बाजार में किल्लत होने और उसकी कालाबाजारी की आशंका के मद्देनजर इस बार शासन ने एसओपी जारी की है। एसओपी के तहत गठित विशेषज्ञों की टीम की संस्तुति पर जरूरत वाले मरीज को यह इंजेक्शन लगेंगे।

ब्लैक फंगस की दवा के इंजेक्शन अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी  कार्यालय से अस्पतालों को दिए जाएंगे। इसके लिए बाकायदा शासन की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया  के तहत इंजेक्शन मुहैया कराए जाएंगे।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल समेत विभिन्न कोविड-अस्पतालों में यह इंजेक्शन न मिलने की वजह से ऐसे मरीज, जिनमें ब्लैक फंगस के लक्षण आ रहे थे उन्हें इंजेक्शन की जरूरत की संभावना को देखते हुए एम्स ऋषिकेश रेफर करना पड़ रहा था।

विशेषज्ञों से सुझाव लेने के बाद शासन ने इस संबंध में एसओपी जारी की है। इसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी गई हैकिसी मरीज को ब्लैक फंगस इंजेक्शन लगाने की जरूरत होगी तो सरकारी विशेषज्ञ डॉक्टर या संबंधित अथॉरिटी को अस्पताल की तरफ से तय फॉर्मेट में इंजेक्शन के लिए डिमांड भेजनी होगी।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्राचार्य एवं स्टेट एडवाइजरी बोर्ड के कोआर्डिनेटर डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि शासन की व्यवस्था के तहत ही इंजेक्शन दिए जाएंगे।

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