प्रदेश में कोरोना संक्रमण के 814 नए मामले , कुल आंकड़ा 41777 पहुंचा

उत्तराखंड कोरोना वायरस
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देहरादून। उत्तराखंड में सोमवार को 814 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले। प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या 41777 हो पहुंच गई है। वहीं, 1172 मरीज ठीक होकर घर लौटे हैं। जबकि ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा 29 हजार हो गया है। प्रदेश में कोरोना से कुल 501 लोगों की मौत हुई है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, सोमवार को 9822 सैंपलों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। कोरोना काल में अब तक दूसरी बार प्रदेश में एक दिन में संक्रमित मामलों से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हुए हैं।

सोमवार को देहरादून जिले में सबसे अधिक 309 संक्रमित मरीज मिले हैं। नैनीताल में 111, हरिद्वार में 110, ऊधमसिंह नगर में 95, अल्मोड़ा में 74, पौड़ी में 24, टिहरी में 23, उत्तरकाशी में 22, रुद्रप्रयाग में 15, चंपावत में 13, चमोली में नौ, बागेश्वर में पांच, पिथौरागढ़ में चार मरीज कोरोना की चपेट में आए हैं।

प्रदेश में सोमवार को 10 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। इसमें एम्स ऋषिकेश में दो, दून मेडिकल कॉलेज में पांच, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में तीन संक्रमितों ने दम तोड़ा है। संक्रमितों की तुलना में ठीक होने वालों की संख्या बढ़ने से रिकवरी दर बढ़ गई है।

वर्तमान में प्रदेश की रिकवरी दर 69.42 प्रतिशत पहुंच गई है। संक्रमण दर सात प्रतिशत अधिक हो गई है। देहरादून जिले की उन प्राइवेट लैब्स पर जांच कमेटी विशेष निगाह रखेगी, जिनके कोरोना सैंपलों की रिपोर्ट बाहर से आती है। कमेटी यह भी देखेगी कि लैब आईसीएमआर की गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं या नहीं।

सोमवार से जांच कमेटी ने काम शुरू कर दिया। कमेटी को सात दिन बाद जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव को रिपोर्ट सौंपनी है। कमेटी की अध्यक्ष सीडीओ नितिका खंडेलवाल ने बताया कि सैंपल लेने के नियमों की पड़ताल की जा रही है। देखा जा रहा है किदो टेस्ट के बीच कितना अंतराल है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है या नहीं।

वहीं, डाटाकलेक्शन की स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी। कुछ लैब्स द्वारा सैंपलिंग के दौरान लोगों के नाम, पते और मोबाइल नंबर गलत दर्ज करने की शिकायत भी मिल रही है। इसकी भी जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में डॉ. लाल, हिमालयन लैब, मैक्स, महंत इंदिरेश अस्पताल, मेट्रो, सिनर्जी, एसएलआर, आहूजा तथा सीएमआई और कनिष्क पैथ लैब को सैंपलिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा पैथकाइंड की सैंपलिंग पर रोक लगाई गई है। 

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