पेयजल निगम में इंजीनियरों का वेतन रोकने पर भारी आक्रोश, एक सप्ताह में मांगों पर कार्रवाई न होने पर अभियंता संघ ने उग्र आंदोलन को चेताया

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल
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देहरादून। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर संघ, पेयजल निगम की आज ऑनलाइन बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के साथ डिप्लोमा इंजीनियर को वेतन से वंचित रखने पर भारी आक्रोश व्यक्त किया गया। संघ पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि डिप्लोमा इंजीनियर सेंटेज प्रोडक्टिव कार्मिक है और इसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका अभियंताओं की है।

इसके बावजूद संपूर्ण प्रदेश में कार्यरत डिप्लोमा इंजीनियरों का वेतन रोका गया है, जबकि पेयजल निगम द्वारा मई माह का वेतन भुगतान किया जा चुका है। संघ नेताओं ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि कम वेतन वाले डिप्लोमा इंजीनियर का वेतन रोका गया है, जबकि उनसे अधिक वेतन वाले कार्मिकों एवं अधिकारियों का वेतन भुगतान कर दिया गया है।

 

इसी तरह वरिष्ठ अधिकारियों को सातवें वेतनमान का भुगतान किया जा चुका है, जबकि वर्तमान तक डिप्लोमा इंजीनियरों को यह भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने निगम प्रबन्धन पर आरोप लगाते हुए कहा कि इससे यह प्रतीत होता है कि बिना आंदोलन के डिप्लोमा अभियंताओं को वेतन एवं भत्ते भी नसीब होने संभव नहीं हो रहे है।

बैठक में उपस्थित संघ पदाधिकारियों ने इस बात पर भी चर्चा की है कि पर्वतीय क्षेत्र की 7 शाखाएं विगत लंबे समय से अधिशासी अभियंता विहीन होने के बाद भी जल जीवन मिशन के कार्य जिस प्रकार प्रभावित नही हो रहे है। उसी नियम से अभियन्ताओ की तैनाती कर दी जाए। मांग की गई है कि एक सप्ताह के भीतर ब्याज समेत वेतन एवं एरियर का भुगतान किया जाए।

बैठक में अभियन्ताओं की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण न होने और समय पर वेतन जारी न होना होने पर चर्चा की गई। साथ ही पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक की तैनाती नहीं होने के कारण उक्त समस्याओं को निस्तारण कराने में एवं प्रबंधन को प्रस्तुत करने में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। सभी ने एक स्वर में पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक की नियुक्ति की भी मांग की है।

वक्ताओं द्वारा कहा गया कि बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर संघ की समस्याओं के निराकरण में पेयजल मंत्री के नाराज होना बताया जाता है और जबकि अन्य सभी कार्य हो रहे  है। पर्वतीय क्षेत्र की सात शाखाएं शाखाध्यक्ष विहीन है और पर्वतीय सोच के राज्य में पहाड़ों पर ही किसी का ध्यान नही है।

वक्ताओं ने कहा कि बड़े आश्चर्य का विषय है कि एक ही अभियंता के एक ही दिन में दो-दो अलग-अलग स्थानांतरण कर दिए गए हैं। संपूर्ण उत्तराखंड क्या पूरे देश में भी ऐसी मिसाल शायद ही देखने को मिले। क्या आदेशों में बैक डेटिंग जैसा कुछ है, इसका भी संदेह उत्पन्न हो रहा है। बैठक में एक सप्ताह के भीतर मांगों पर प्रभावी कार्यवाही न होने पर किसी भी तिथि से संपूर्ण प्रदेश एवं मुख्यालय कार्यालय पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

ऑनलाइन बैठक में संघ के अध्यक्ष रामकुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरविंद सजवाणम, महासचिव अजय बेलवाल, कुमाऊं अध्यक्ष प्रकाश चंद जोशी, गढ़वाल अध्यक्ष दिनेश दवाण, वाइस चेयरमैन भुवन चन्द्र जोशी, संगठन सचिव जे0बी0 शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य सतेन्द्र कुमार, प्रमोद कोठियाल, वित्त सचिव भजन सिंह चौहान, मोहित जैन आदि शामिल रहे।

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