लापरवाही: पेयजल निगम मुख्यालय में अधिकारी नदारद, व्यवस्था चौपट, काम लटके

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल कोरोना वायरस
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देहरादून। उत्तराखंड पेयजल निगम मुख्यालय में मुख्यालय आजकल विरान पड़ा है। बताया जा रहा है कि कई दिनों से अधिकारी दफ्तर झांक तक नहीं रहे हैं तो कर्मचारी भी लापरवाह बने हैं। जबकि निगम आवश्यक सेवा से जुड़ा विभाग हुआ है। यह स्थिति तब है जब प्रधानमंत्री के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट ‘जल जीवन मिशन’ जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं निगम के पास है। यही नहीं कई कोविड सेंटरों का निर्माण कार्य भी निगम के पास है। कई जगह वाटर सप्लाई का जिम्मा भी निगम देख रहा है। ऐसे में तेजी दिखााने के बजाय अफसर घरों में कैद हो गए, जो तमाम सवाल खड़े करता है।

बता दें कि कोविड गाइडलाइन के मुताबिक आवश्यक सेवा से जुड़े अधिकारियों को शत प्रतिशत और 50 फीसदी कर्मचारियों को ड्यूटी पर रहना अनिवार्य है, लेकिन निगम मुख्यालय में आलम यह है कि अधिकारी दफ्तर से नदारद हैं और कार्मिकों का हाल यह है कि डाक रिसीव तक करने तक के लिए कोई नहीं है। कई दिनों से दफ्तर खाली पड़ा है। भारी भरकम स्टाफ वाले निगम मुख्यालय में अधिकारियों की गैर मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है।

कोविड के दौरान जहां तक घर से काम करने का सवाल है तो यह कर्मचारियों के लिए है न कि अधिकारियों के लिए। फाइलों का निस्तारण तो घरों में नहीं होगा। पिछले तीन माह से कार्मिकों को वेतन-पेंशन नहीं मिली है। निर्माण समेत कार्मिकों की प्रोन्नति आदि कई जरूरी मामलों की फाइलें निगम मुख्यालय में धूल फांक रही है, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है।

सवाल यही है कि आखिर ये लापरवाही क्यों। क्यों निगम अफसर काम करने से कतरा रहे हैं। क्या अफसर कोरोना के खौफ से दफ्तर नहीं आ रहे हैं। यदि ऐसा है तो यह यह गम्भीर बास्त है। इस महामारी में पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य समेत कई आवश्यक सेवाओं से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता चौबीसों घण्टे सेवा में जुटे हैं। उन्हें भी घर पर रहना अच्छा लगता है, लेकिन वह ड्यूटी के साथ फर्ज निभाने रोजाना काम पर लौटते हैं।

यह बिडम्बना ही कहेंगे की निगम के डिवीजन एक्टिव मोड में है और मुख्यालय डिएक्टिवेट। जबकि मुख्यमंत्री तीरथ सिंंह रावत खुद दौड़ भाग में लगे हैं। वह अफसरों को हिदायत भी दे चुके हैं कि कोविड नियमों के साथ काम में किसी भी तरह की लापरवाही न बरखा जााा। लेकिन लगता है कि पेयजल निगम मुख्यालय में मुख्यमंत्री के निर्देशों का कोई असर नहीं है।

इस सम्बन्ध में जब निगम के प्रबंध निदेशक एसके पन्त से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मुख्यालय में दो कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव आ गए थे। इसलिए दो दिन तक दफ्तर को सैनिटाइज किया गया। बुधवार से सभी अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे।

10 thoughts on “लापरवाही: पेयजल निगम मुख्यालय में अधिकारी नदारद, व्यवस्था चौपट, काम लटके

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