पेयजल निगम और जल संस्थान के राजकीयकरण मामले में मुख्यमंत्री धामी ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल
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देहरादून। उत्तराखंड पेयजल निगम और उत्तराखंड जल संस्थान के राजकीयकरण को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन को निर्देश दिए है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को दोनों विभागों के एकीकरण की कार्रवाई करने केे निर्देश दिए।

अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति, उत्तराखंड पेयजल निगम के आंदोलन नोटिस के क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि समिति की एक मात्र मांग पेयजल निगम के राजकीयकरण की है। इसके अतिरिक्त कोई अन्य मांग नहीं है।

पेयजल निगम और जल संस्थान के राजकीयकरण होने से सबसे अधिक लाभ उत्तराखण्ड राज्य की जनता को होगा।  साथ ही पेयजल समस्या के समाधान के लिए एकल उत्तरदायी विभाग के होने से पेयजल योजनाओं की उपादेयता बढ़ेगी।

यही नहीं इससे अनावश्यक और दोहरे अलाभकारी निर्माण की समस्या भी समाप्त होगी। उत्तराखण्ड पेयजल निगम और उत्तराखंड जल संस्थान के एकीकरण व राजकीयकरण होने से अधिष्ठान व्यय में कटौती होगी, जो उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य के लिए अत्यन्त लाभदायक है।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांग को लेकर राज्य सरकार गंभीर है। सीएम ने मांग पत्र पर शीघ्र निर्णय करने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिए।

प्रतिनिधिमंडल में अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति के अध्यक्ष इंजीनियर जितेंद्र सिंह देव, पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इंजीनियर पीएस रावत, सहायक अभियंता एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर सौरभ शर्मा, डिप्लोमा इंजीनियर संघ के प्रांतीय महासचिव इंजीनियर अजय बेलवाल, पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विजय खाली व महासचिव धर्मेंद्र चौधरी, जल संस्थान जल निगम मजदूर यूनियन के उपाध्यक्ष मनमोहन सिंह नेगी, लाल झंडा मजदूर यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष लक्ष्मी चंद्र भट्ट, पूर्व महासचिव ईश्वर पाल शर्मा और उपाध्यक्ष विशेष शर्मा आदि मौजूद रहे।

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