जैसी करनी-वैसी भरनी: भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे भजन सिंह को रिटायरमेंट पर लग सकता है बड़ा झटका

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल राजकाज
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  • एमडी पद से हटाए गए भजन सिंह का इधर आज रिटायरमेंट, उधर हाईकोर्ट में उनके खिलाफ आज आखिरी अंतिम सुनवाई, भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सरकार की प्राम्भिक जांच भी पूरी, सरकार दे सकती है चार्जशीट

देहरादून। कहावत है कि जिसकी जैसी करनी, वैसी भरनी। जी हां, यह सौ आना सच है। जो जैसा कर्म करेता है उसे उसका वैसा ही फल मिलता है। सतयुग, द्वापरयुग का जमाना नहीं कि कर्म का फल सौ-सौ साल बाद भोगना पड़े।

आप सोच रहे होंगे कि हम आपको कोई प्रवचन या कहानी नहीं सुना रहे हैं। हम उपरोक्त पंक्ति की हकीकत से आपको समझाना चाहते हैं कि अच्छे काम का अच्छा नतीजा और बुरे काम का बुरा नतीजा अवश्य मिलता है।

ऐसे तो सैकड़ों उदाहरण आपके सामने है, लेकिन एक ताजा उदाहरण हम आपको बताना चाहते हैं, जिससे आप विज्ञ भी हैं। फिर भी कुछ बातें ऐसी होती है, जो समय-समय पर खुद ब खुद सामने आ जाती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड पेयजल निगम के निवर्तमान प्रबन्ध निदेशक और वर्तमान में पेयजल सलाहकार भजन सिंह की। वही भजन सिंह जिनके भ्रष्टाचार के चर्चे आम हैं।

पेयजल निगम से लेकर शासन और सरकार के ही नहीं न्याय के दरबार हाईकोर्ट तक उनके कारनामों के चर्चे हैं। आज यह बात इसलिए बतानी दीगर हो रही है कि आज वह नौकरी से रिटायर हो रहे हैं। उन पर भ्रष्टाचार के 100 से अधिक आरोप हैं। कई मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं। निर्माण कार्यों के टेंडरों के नियम शर्तों में धाँधली कर नियम विरूद्ध तरीके से टेंडर आवंटित करने भी के उन पर आरोप है।

शासन में गलत तथ्य पेश करके एमडी की नियमावली में मनमुताबिक बदलाव कराकर वह लम्बे समय तक कुर्सी पर रहे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने वर्ष 2005 में जूनियर इंजीनियर की भर्ती में धांधली की। दूसरे प्रदेश के अभ्यर्थियों को उत्तराखंड में आरक्षण का लाभ देकर नियमों की धज्जियां उड़ाई। अभियन्ताओं की एसीआर में हेराफेरी और मनमाने ढंग से लिखने में भी वह विवादों में रहे है।

पेयजल योजनाओ के पैसे दूसरे मदों में उनके द्वारा खर्च किये गए। ट्रांसफर पोस्टिंग भी पेयजल निगम उद्योग बन गया था। बगैर गांधी जी के कोई काम कराना मुश्किल हो गया था। चहेतों को हमेशा मलाईदार पोस्टिंगें देकर वह हमेशा चर्चाओं में रहे। बात यहां तक उठ गई थी कि पेयजल निगम के बजाए कार्मिक विभाग को भजन सिंह एंड कम्पनी कहने लगे थे। आरोप है कि भजन सिंह की कई कम्पनियां हैं और वह कई सौ करोड़ के मालिक हैं।

आय से अधिक सम्पत्ति का मामला भी उनके ख़िलाफ चल रहा है। बतासिया जा रहा है की ईडी भी इस इस मामले में उनसे पूछताछ कर रहा है। भ्रष्टाचार के चलते वह सरकार की साख पर बट्टा लगा रहे तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को उन्हें रिटायरमेंट से दो पूर्व पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक के पद से हटाना पड़ा।

भजन सिंह पर बड़ा आरोप यह भी है कि जो अधिकारी भ्रष्टाचार के काम मे उनका साथ नहीं देते थे तो उन्हें वह तुरंत चार्जशीट थमा देते थे। जिस चार्जशीट के नाम पर वह अधीनस्थ अधिकारियों को डरा-धमका कर राज करते थे आज वही चार्जशीट रिटायरमेंट पर उन्हें तोहफे के रूप में मिल सकती है।

दरअसल आज इधर उनका रिटायरमेंट है और उदजर हाईकोर्ट में उनकी नियुक्ति और भ्रष्टाचार को केकर अंतिम सुनवाई है। सूत्रों का कहना है कि हाईकोर्ट कोई बड़ा निर्णय सुना सकता है। वहीं दूसरी ओर उन पर लगे आरोपों सरकार ने प्रारम्भिक जांच कराई, जिसमे कई आरोप सही पाए जाने बताये जा रहे हैं। सरकार की ओर से भी उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई होने की चर्चा है। ऐसे में उनके रिटायरमेंट के जश्न में रंग ने भंग पड़ सकता है।

सूत्रों का कहना है जब तक उनके ऊपर लगे आरोपों की जांच पूरी नही हो जाती है तब तक उनके सारे फंड और पेंशन आदि पर रोक लग सकती है। शाम तक हाईकोर्ट का निर्णय भी पहुंच जाएगा। सरकार भी इसी का इंतजार कर रही है।

कुल मिलाकर भजन सिंह रिटायरमेंट के दौरान चारों तरफ से घिर गए है, जिससे पार पाना उनके लिए ऊंट के मिह में जीरा निकालना जैसा होगा। भजन सिंह पर कार्यवाई को लेकर सबकी निगाहें कोर्ट के साथ हो त्रिवेंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर टिकी है।

139 thoughts on “जैसी करनी-वैसी भरनी: भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे भजन सिंह को रिटायरमेंट पर लग सकता है बड़ा झटका

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