जल विद्युत परियोजनाओं के मेंटेनेंस घपले की जांच शुरू, नप सकते हैं दो पूर्व एमडी

राजकाज
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देहरादून। आखिरकार त्रिवेन्द्र सरकार ने घपले-घोटालों में संलिप्त अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। जल विद्युत परियोजनाओं के मेंटेनेंस पर नियमों को ताक पर रख कई सौ करोड़ रुपये का घपला किया गया है। भ्रष्टाचार की शिकायतों का संज्ञान लेकर शासन ने मामले के जांच के आदेश जारी किए हैं। इस मामले की लंबे समय से जांच की मांग की जा रही थी।

बता दें कि पछवादून क्षेत्र की छिबरो, डाकपत्थर और खोदरी जल विद्युत परियोजना में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गई। लगभग 98 करोड़ के एक ही मेंटेनेंस कार्य को सिंगल कोटेशन पर चहेती कम्पनी को आवंटित किया गया। इसी तरह कई अन्य मामले हैं।
मार्केट दर से कई गुना ऊंचे दामों पर सामान खरीदा गया, जिस पर विद्युत नियामक आयोग के तत्कालीन चेयरमैन में सुभाष कुमार ने सवाल ही नहीं उठाए थे, बल्कि कार्रवाई के लिए भी लिखा था। लेकिन आयोग की रिपोर्ट को दबा दिया गया।

परियोजना के स्वीच यार्ड, ब्रेकर, वैक्यूम सर्किट की जो दरें यूजेवीएनएल की परचेज कमेटी ने तय की, वही सामान यूपीसीएल और पिटकुल में काफी कम दरों पर खरीदा गया। आरोप यह भी है कि परियोजना क्षेत्र में वेंटीलेशन के सिस्टम अनावश्यक रूप से लगा दिया गया।
यह घपला यूजेवीएनएल के पूर्व एमडी एसएन वर्मा के कार्यकाल का है। वर्मा झारखंड बिजली बोर्ड में भी अनियमितत्ताओं के आरोपी हैं।

इस मामले में यूजेवीएनएल के तत्कालीन निदेशक ऑपरेशन और ऊर्जा निगम के निवर्तमान एमडी बीसीके मिश्रा भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। बीसीके मिश्रा यूजेवीएनएल में तब निदेशक ऑपरेशन के पद पर कार्यरत थे। यूजेवीएनएल में ईआरपी घोटाला भी खूब चर्चाओं में रहा है। इस मामले की जांच होनी भी बाकी है।

बीसीके मिश्रा पर यूजेवीएनएल ही नही ऊर्जा निगम में एमडी जे पद पर रहते हुए नियुक्ति समेत अनियमितताओं के दर्जनों मामले हैं। इस मामले में दोनों पूर्व अफसरों पर कार्यवाई होनी तय मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बचे हुए डेढ़ साल के कार्यकाल में ज़ीरो टॉलरेंस नीति का कड़ाई से पालन कराने के मूड में है।

सूत्रों की मानें तो यदि इन दोनों अफसरों पर कार्रवाई होती है तो इससे सरकार की ही छवि नहीं सुधरेगी, बल्कि दूसरे विभागों और निगमों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। अब देखना यह है कि सीएम त्रिवेन्द्र सिंह एक्शन लेते हैं या फिर वह भी धृष्टराष्ट्र की तरह आंखों में काली पट्टी बांधकर सरकारी खजाने को भ्रष्ट अफसरों से लुटाते हैं।

बता दें कि शासन ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड में जल विद्युत परियोजनाओं की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये के घपलों की जांच के दायरे में उक्त दो पूर्व प्रबंध निदेशको भी सिंगल कोटेशन पर करोड़ों का टेंडर देने वाली परचेज कमेटी के अन्य सदस्य भी लिए जा रहे हैं।
शासन ने जांच अपर सचिव वित्त अरुणेंद्र सिंह चौहान को सौंपी है। उन्हें एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है।

इस संबंध में अपर सचिव ऊर्जा भूपेश चंद्र तिवारी ने जांच आदेश जारी किए हैं। इसमें विद्युत नियामक आयोग के आदेश का उल्लेख किया गया है। आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19 में छिबरों, डाकपत्थर और खोदरी जल विद्युत परियोजनाओं के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई है, जिनमें उठाए गए गंभीर तथ्यों की जांच की जा रही है।

शिकायत के बाद राजभवन ने मांगी रिपोर्ट

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के आदेश के आधार पर एक शिकायत राजभवन भी पहुंची। यूकेडी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एपी जुयाल ने यह शिकायत की। उनकी शिकायत पर राज्यपाल के सचिव बृजेश कुमार संत ने सचिव ऊर्जा से रिपोर्ट मांगी। जुयाल ने बताया कि मैंने राजभवन में शिकायत की है।

प्रदेश सरकार और राज्यपाल से आरोपी के कार्यकाल की जांच और सेवा विस्तार न दिए जाने का अनुरोध किया। साथ ही विद्युत नियामक आयोग के आदेश के क्रम में जल विद्युत परियोजना में घपले की जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा निगमों में घपले न होते तो राज्य में बिजली सस्ती होती है और सरकार को आर्थिक मदद मिलती।

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