गैरसैंण को कमिश्नरी बनाकर मुख्यमंत्री ने की विरोधियों की बोलती बंद

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देहरादून। पूर्व के नेताओं की तरह हवाई घोषणाओं से बिल्कुल इतर सीएम त्रिवेंद्र ने पहले पूरी मजबूती के साथ गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया और फिर अपनी इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने को 25 हजार करोड़ की घोषणा करते हुए 10 वर्ष का रोडमैप बनाया। यही नही गैरसैंण को कमिश्नरी का दर्जा दिलाकर उन्होंने सबको चौंका दिया है।

इसी सिलसिले में गैरसैंण में सुरक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य, पर्यटन के इंतजाम अब युद्धस्तर पर सुदृढ़ हो रहे हैं। इतना सब होने के बावजूद इसके बाद भी खिसियायी बिल्ली की तरह विरोधी गैरसैण पर सवाल कर रहे हैं। थे, कि जो जिला नहीं बना पा रहे हैं वो राजधानी बनाएंगे, यह सब शिगूफा है, पानी पी पी कर यह बात विरोधी और विपक्षी कहीं गुपचुप और कहीं खुलकर लोगों को बरगला रहे थे।

फिर कुछ जगहों से गैरसैण को जिला बनाने की भी मांग उठी। लेकिन गैरसैण को सूबे का तीसरा मंडल बनाकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जहां जनता का भरोसा और पुख्ता कर दिया है वहीं मौकापरस्तों की भी बोलती बंद कर दी है।

हर बार अपने फैसलों से चौंकाने वाले सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बार बजट पेश करते हुए गैरसैंण को कमिश्नरी बनाकर एक ऐसा कार्ड खेला है जो आम जनमानस को जितना खुश करने वाला है, उनके विरोधियों को उतना ही परेशान करने वाला दिख रहा है। जो लोग गैरसैंण को जिला तक न बनाने की बात कहकर मुंह बना रहे थे, कमिश्नरी की धमक से अब उनकी बोलती बंद है।

आने वाले साल में विधान सभा चुनाव हैं और ऐन चुनाव से पहले सीएम त्रिवेंद्र की ओर से फेंका गया यह पत्ता निश्चित रूप से तुरूप ही साबित होगा। एक साल पहले सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करके सबको हैरत में डाल दिया था। हालांकि तब त्रिवेंद्र की दृढ़ता और संकल्पशक्ति को दर किनार करते हुए विपक्ष ने ग्रीष्मकालीन राजधानी को कोरी घोषणा बताया।

फेसबुक और वाॅटसअप यूनिवर्सिटी की प्रतिभाओं ने तो ग्रीष्मकालीन राजधानी का ऐसा मजाक बनाया कि आमजन को भी यह एक बार तो मजाक ही लगने लगा था। क्या करें उन्होंने…… पूर्व में सूबे की आवाम ने सियासी गिरगिटों के कई तरह के रंग जो देखे थे। लेकिन अब यहां के जनमानस की समझ में भली प्रकार से आ गया है कि सीएम त्रिवेंद्र तो अपने इरादों के पक्के हैं। जो कहते हैं उसे अमली जामा पहनाने में उनकी दृढ़ता का कोई सानी नहीं है।

तीसरा मंडल बनाते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस संतुलन का ध्यान रखा है उससे यह भी साफ कि बेहतर प्रबंधन के मामले में भी वह माहिर हैं। गैरसैण कमिश्नरी में गढ़वाल मंडल के रूद्रप्रयाग व चमोली तथा कुमाउं मंडल के बागेश्वर व अल्मोड़ा जनपद को शामिल किया गया है।

अब तीनों मंडलों में क्षेत्रफल व आबादी के साथ ही मिजाज का भी जबरदस्त संतुलन है। इस फैसले से संबंधित चारों जनपद भी कमिश्नरी हैडक्वार्टर के करीब आ गए हैं। सीएम त्रिवेंद्र ने अब ऐसी बैटिंग शुरू कर दी है, जिसका तोड़ फिलहाल ना तो विपक्षियों के पास है और ना ही उनके विरोधियों के पास ही है।

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