गेस्ट टीचरों को लेकर धामी सरकार के निर्णय का स्वागत, राजकीय शिक्षकों का विरोध जताना बेसिरपैर

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– हम हैं राजकीय शिक्षकों के भाई-बहिन, इसलिए विरोध के बजाय करें सहयोग: गेस्ट टीचर

देहरादून। उत्तराखंड में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को लेकर धामी सरकार द्वारा लिए गए निर्णय पर राजकीय शिक्षकों संघ के विरोध को अनुचित ठहराया जा रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट का ऐसा कोई आदेश नहीं है जिसमें सरकार को अतिथि षिक्षकों के हित में निर्णय लेने पर पाबंदी लगाई गई है। ऐसे में राजकीय शिक्षकों के द्वारा विरोध जताना न्यायसंगत नहीं है।

बता दें कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए की गई थी। अतिथि शिक्षकों की तैनाती ज्यादातर दुर्गम इलाकों में ही की गई है, जहां लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त थे। वैसे भी परमानेंट शिक्षक दुर्गम क्षेत्रों में कम ही ठहरते हैं।

पिछले 6 साल से गेस्ट टीचर दुर्गम इलाकों में मामूली वेतन में काम करने को मजबूर हैं। मामला बीच में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने से कुछ समय के उनकी सेवाएं प्रभावित हुई, लेकिन बाद में छात्रों के हितों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही अतिथि शिक्षकों की बहाली हुई। सरकार भी गेस्ट टीचरों के काम की सराहना कर चुकी है। ऐसे में छात्रहितों को सर्वोपरी रखते हुए विरोध की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

माध्यमिक अतिथि शिक्षक संगठन के प्रदेश महामंत्री दौलत जगूड़ी ने गेस्ट टीचरों के मानदेय बढ़ोत्तरी और गेस्ट टीचर के पदों को रिक्त न मानने के धामी कैबिनेट का स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का आभार जताते हुए कहा कि गेस्ट टीचरों के भविष्य को लेकर धामी सरकार द्वारा लिए गए निर्णय से कहीं भी परमानेंट शिक्षकों का कोई अहित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह विरोध सिर्फ कुछ शिक्षक कर रहे हैं, जो कोर्ट के नाम पर सरकार पर अनावश्यक दबाव बनाकर शासन को गुमराह करने का षड्यंत्र रच रहे हैं, जो औचित्यहीन है।

दौलत जगूड़ी ने कहा कि गेस्ट टीचरों के बार-बार प्रभावित होने से सरकार ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पदों को रिक्त न मानने से स्थाई शिक्षकों के प्रमोशन और तबादलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि रिक्त पदों की संख्या अत्यधिक है। गेस्ट टीचर उनके ही भाई-बहिन हैं। इसलिए गेस्ट टीचरों के भविष्य को लेकर सरकार ने जो निर्णय लिया है। उसका विरोध करने के बजाय सहयोग करना चाहिए।

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