गजब: उत्तराखंड में उत्पादित ऑक्सीजन 50 फिसदी दूसरे राज्यों को सप्लाई, खुद मंगा रहे बंगाल-झारखंड से, हाईकोर्ट ने उठाए नीति पर सवाल

उत्तराखंड कोरोना वायरस
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नैनीताल। आक्सीजन की भारी कमी के बीच उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की आक्सीजन आवंटन नीति पर सवाल उठाते हुए राज्य को पुनः इस मामले में केंद्र से बात करने को कहा है। अदालत ने प्रदेश की आक्सीजन को बाहरी राज्यों को भेजने और प्रदेश को झारखंड व बंगाल से आक्सीजन आपूर्ति करने को गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्रदेश में उत्पादित आक्सीजन पर पहले उसी राज्य की जनता का हक होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कोविड-19 महामारी को लेकर उच्च न्यायालय में लगभग आधे दर्जन विभिन्न जनहित याचिकायें दायर की गयी हैं। इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान प्रदेश में आक्सीजन की कमी का मामला उठा। प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य में आक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिये विगत 7 मई को केंद्र सरकार को पत्र भेजा गया है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।

बताया गया कि प्रदेश में देहरादून, हरिद्वार व उधमसिंह नगर जनपद में मौजूद तीन आक्सीजन संयंत्रों से 358 मीट्रिक टन आक्सीजन का उत्पादन किया जाता है। आक्सीजन का आवंटन केंद्र सरकार की निगरानी में किया जाता है। इसलिये प्रदेश को इसमें से मात्र 183 मीट्रिक टन आक्सीजन ही उपलब्ध करायी जाती है। शेष आक्सीजन केंद्र के निर्देश पर अन्य राज्यों को भेज दी जाती है।

प्रदेश सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि इसके बदले उत्तराखंड में झारखंड के जमशेदपुर व पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से आक्सीजन उपलब्ध करायी जा रही है, जो कि सामयिक दृष्टि से अनुपयोगी है। इसमें समय व धन भी अधिक बर्बाद होता है जो  कोरोना महामारी के लिहाज से उपयुक्त नहीं है।

केंद्र सरकार के सहायक सॉलिसिटर जनरल राकेश थपलियाल की ओर से अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों के साथ संतुलन कायम किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि केंद्र के जवाब से अदालत संतुष्ट नजर नहीं आयी। अदालत ने इस पर भारी नाराजगी जतायी कि केंद्र सरकार का कोई अधिकारी अदालत में पेश नहीं हुआ और अपनी टिप्पणी में गैर जमानती वारंट जारी करने की बात भी कही।

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