कर्मचारी नेता बोले, ऊर्जा निगम प्रबंधनों की संवेदनाएं मर गई, 28 तारीख से हड़ताल पर वह अडिग

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– कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर संयुक्त मोर्चा और ऊर्जा निगम प्रबन्धन आमने-सामने

देहरादून। सोमवार को विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सभी घटक संघों की एक सभा गूगल मीट के माध्यम से आयोजित की गई। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारियों के लिए ऊर्जा निगम प्रबंधनों की संवेदनाएं मर गई है। अब कर्मचारियों के सामने हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। संकल्प लिया कि जब प्रबंधनों ने कर्मचारियों के लिए समस्याओं के समाधान के दरवाजे बंद कर दिए हैं, तो वह भी प्रबंधनों को चैन से नहीं रहने देंगे।

ऊर्जा निगम में कर्मचारियों की समस्याओं के विषय में पहले जनवरी और फिर मार्च में पत्र के माध्यम से तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों को अवगत कराया गया था। समस्याओं पर कोई कार्यवाही नहीं होने की दशा में मोर्चा ने 13 मई से 27 मई तक विभिन्न कार्यक्रमों के साथ 28 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल रखी गई थी।

वर्तमान में कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण राज्य में विषम परिस्थितियां उत्पन्न हो रखे हैं। इसके कारण समूचा स्वास्थ्य तंत्र ओवर लोडेड है। सभी सेवाओं के मूल में विद्युत आपूर्ति की 24 घंटे निरंतरता अति आवश्यक है।

इस आपातकाल के समय में संगठनों द्वारा राज्य की जनता के हितों के लिए तथा विद्युत आपूर्ति की निरंतरता की महत्व को देखते हुए यह निर्णय लिया गया था कि 13 से 27 मई तक आंदोलन कार्यक्रम में आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रम, जिसमें गेट मीटिंग और विशाल रैली का आयोजन था उसे स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि 28 मई की प्रथम पाली से होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अगली मीटिंग में विचार किया जाएगा। सभा की अध्यक्षता प्रदीप कंसल और संचालन संयोजक इन्सारूल हक ने किया।

आज की सभा में मुख्य रूप से 28 तारीख से तीनों ऊर्जा निगमों में पूरे राज्य में हड़ताल किए जाने के निर्णय को यथावत रखा गया तथा तीनों ऊर्जा निगमों के सभी नियमित संविदा सेल्फ-हेल्फ़ ग्रुप के कर्मचारी 28 मई की प्रथम पाली से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।

सभा में सभी वक्ताओं ने ऊर्जा के तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों की संवेदनहीनता पर खेद व्यक्त किया। कहा कि पर्याप्त समय होने के बाद उनके द्वारा ना तो समस्याओं पर कोई कार्यवाही की गई और ना ही कोई संवाद संगठनों के साथ किया गया।

सभी संगठनों के पदाधिकारियों का का विचार था कि शायद निगम प्रबंधन आंदोलन को उकसा रहा है। अभी तक उत्तराखंड पावर कारपोरेशन और ट्रांसमिशन कारपोरेशन के द्वारा समस्याओं पर ना तो वार्ता की गई और ना कोई कार्यवाही की गई है। जल विद्युत निगम द्वारा आंदोलन समाप्त करने की अपील जारी की है।

जबकि तीनों ऊर्जा निगमों में लगभग 25 कर्मचारी कोरोनाकाल में शहीद हो चुके हैं। अभी तक किसी को कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की गई ना ही किसी पीड़ित परिवार को रोजगार प्रदान किया गया।

सभी वक्ताओं ने दिसंबर 2017 के समझौते और उसके बाद प्रमुख सचिव ऊर्जा समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आश्वासन देने के बाद भी निगमों के कर्मचारियों की समस्याओं पर कोई कार्यवाही न करने पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया।

कहा कि केवल जनता के हितों और राज्य की जनता की सहायता के लिए कार्मिक विपरीत परिस्थितियों में भी कार्य कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधनों ने समुचित कार्यवाही नहीं की तीनों निगमों के द्वारा संवादहीनता दिखाते हुए कार्मिकों की समस्याओं को लगातार 4 वर्ष से अनदेखा किया हुआ है, जिस कारण 28 मई को प्रस्तावित हड़ताल को फिलहाल यथावत रखने का निर्णय लिया गया।

सभा में वक्ताओं ने आपदाकाल में रात दिन कार्य करने के बाद भी विद्युत निगम के नियमित, संविदा और सेल्फ-हेल्फ़ ग्रुप के कार्मिकों को कोविड वैक्सीन उपलब्ध न कराने पर घोर असंतोष प्रकट किया। इससे उनकी जान को काफी खतरा बना है। कई साथी कर्मी शहीद हो चुके हैं और कई कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं। आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन जानबूझकर ऊर्जा निगम के कार्मिकों को फ्रंटलाइन वारियर्स से बाहर रखे हुए हैं।

सभा में इंजीनियर पंकज सैनी, अमित रंजन, मुकेश कुमार, सुधीर कुमार सिंह, आनंद सिंह रावत, विनोद कवि, सन्दीप शर्मा, प्रदीप कंसल, प्रेम भट्ट, दीपक पाठक, एसके थपलियाल, केहर सिंह, डीसी ध्यानी, मोहम्मद रियाज, विशाल गुप्ता, विक्की दास, भानु जोशी, प्रमोद कुमार, वाईएस तोमर, सुनील मोगा, मोहम्मद अनीस, विवेक कुमार आदि ने अपने विचार रखे। सभा मे राज्य में तीनों ऊर्जा निगमों के सभी संगठनों के अध्यक्ष एवं महामंत्रियों ने प्रतिभाग किया।

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