ऊर्जा निगम के पूर्व प्रबंध निदेशक मिश्रा पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई

राजकाज
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देहरादून। देर से ही सही, सरकार निगमों में हो रहे भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की तैयारी में है। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद त्रिवेंद्र सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति का अब कड़ाई से पालन कराने के संकेत दिए हैं। इस लिस्ट में सबसे ऊपर ऊर्जा निगम है।

दरअसल, बीसीके मिश्रा का पूरा कार्यकाल विवादों में रहा है। कार्मिकों से जुड़े कई विवाद भी उनसे जुड़े हुए हैं। या यूं कहें कि विवादों से उनका चोलिबड़ामन का साथ रहा है। वर्ष 2007 में यूजेवीएनएल में बगैर विज्ञप्ति के अधिशासी निदेशक का पद लपकने से लेकर यूपीसीएल में एमडी बनने तक वह अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। रिटायर होने के बाद भी विवाडॉन की काली छाया उनका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है।

ऊर्जा निगम में अनियमितताओं की कई शिकायतें सरकार और शासन को मिली है। बताया जा रहा है कि ऊर्जा निगम के पूर्व प्रबंध निदेशक बीसी के मिश्रा पर जांच का शिकंजा कस सकता है। कुछ दिन पहले ही एमडी का कार्यकाल पूरा करने वाले मिश्रा के खिलाफ अनियमितताओं की कई गंभीर शिकायतें सरकार को मिली है। सूत्रों की मानें तो जांच के दायरे में आए बीसीके मिश्रा पर आजकल में बड़ी कार्रवाई के आदेश जारी हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ। इस वजह से पूर्व एमडी बीसी के मिश्रा जांच के दायरे में है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मिश्रा के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए पत्रावली चल रही है। अभी पत्रावली उन तक नहीं पहुंची है। पत्रावली मिलते ही कार्रवाई के आदेश जारी किए जाएंगे।

मिश्रा की गलत नियुक्ति का सरकार संज्ञान ले रही है। हाईकोर्ट में भी इस मामले से सम्बंधित याचिका लंबित है। इसके अलावा मिश्रा के कार्यकाल में गलत तरीके से मेंटेनेंस से सम्बंधित सिविल कार्यों में अनाप-सनाप खर्च करने का भी आरोप है। हरिद्वार में चल रहे कुम्भ कार्यों में भी अनियमितताओ की शिकायतें सरकार को मिली है।

ट्रांफार्मर के साथ ही केबल, मीटर, बिजली सेल-परचेज, विद्युत पोल आदि खरीद में गम्भीर अनियमिततायें सरकार के संज्ञान में आई है। सी एन्ड पी में टेंडर खरीद के अलावा आईडीएसपी और सौभाग्य योजना में भी गड़बड़ी का सरकार संज्ञान ले रही है। चहेते अधिकारियों की पोस्टिंग और अनियमितताओं के आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच दबाने पर भी मुख्यमंत्री मिश्रा पर खफा है।

चर्चा थी कि तीन साल पूरे करने के बाद मिश्रा का कार्यकाल करीब 1 से 2 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए मिश्रा ने केंद्र से भी सिफारिश लगाई थी, लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त मिश्रा को विदा करना ही सरकार ने उचित समझा।

शासन के सूत्रों की मानें तो मिश्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की कार्रवाई के लिए शासन ने पत्रावली तैयार कर दी है, जिसे मुख्यमंत्री को भेज दी है। चर्चा है कि पत्रावली पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन मिलते है आजकल में जांच के आदेश जारी हो सकते हैं।

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