उत्तराखंड में हड़ताल पर गए ऊर्जा कर्मी, देर रात्रि तक ऊर्जा भवन में जुटे सैकड़ों कार्मिक, शासन से वार्ता बेनतीजा, मंगलवार से होगी बत्ती गुल

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल
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देेेहरादून। उत्तराखंड में सोमवार रात्रि 12 बजे से ऊर्जा कर्मी हड़ताल पर चले गए हैं। शासन स्तर पर वार्ता विफल होने के बाद आंदोलन को लीड कर रहे शीर्ष पदाधिकारियों ने स्ट्राइक की घोषणा कर दी है। देर रात्रि तक ऊर्जा भवन में बड़ी तादाद में कर्मचारी डटे हुए हैं। उनका एक ही कहना है कि मांगें पूरी नहीं तो हड़ताल भी वापस नहीं होगी। धरना स्थल पर जमकर नारेबाजी हो रही है। इससे पहले इतने गुस्से में ऊर्जा कर्मी कभी नहीं दिखे।

इस बार सरकार के खिलाफ भड़के ऊर्जा कर्मियों के गुस्से ने तूफान का रूप अख्तियार कर लिया है। उत्तराखंड बनने के बाद यह पहला मौका है जब ऊर्जा से जुड़े 10 कर्मचारी संगठन एक बैनर तले एकजुट होकर लड़ाई लड़ रहे हैं। ऊर्जा कर्मियों का आक्रोश किस करवट बैठेगा यह तो पता नहीं है, लेकिन हड़ताल के चलते उत्तराखंड की आवाम को बिजली कट के साथ पानी का संकट भी झेलना पड़ेगा।

लम्बे समय से एसीपी समेत विभिन्न मांगों को लेकर संघर्षरत ऊर्जा कर्मियों का सब्र टूट गया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि  निगम प्रबंधनों और शासन के चक्कर लगाते-लगाते चक्करघिन्नी बने पदाधिकारियों ने मजबूर होकर यह सख्त निर्णय लिया है। लेकिन शासन और सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। हड़ताल वह भी नहीं चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह दब करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बसिंर तले 14 सूत्रीय मांग को लेकर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार दोपहर को यूजेवीएनएल मुख्यालय पर शांतिपूर्ण तरीके से सत्याग्रह रैली निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में सभी जिलों के पदाधिकारियों ने हिसा लिया। इसके बाद आंदोलित कर्मचारी ऊर्जा भवन पहुंचे, जहां उन्होंने हड़ताल को तम्बू गाड़ दिया।

इस बीच मोर्चा पदाधिकारियों की पहले सचिव ऊर्जा सौजन्या जावलकर और उसके बाद मुख्य सचिव एसएस संधू से वार्ता हुई, लेकिन वार्ता पूरी तरह विफल रही। वार्ता में कई मांगों को लेकर सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद पूर्व निर्धारित हड़ताल की घोषणा कर दी गई।

इस दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने शासन और प्रबन्धन के नकारात्मक रवैये पर घोर आक्रोश प्रकट किया। कहा कि लगातार कई वर्ष से संघर्ष करने के बाद भी कर्मचारियों की 9, 14 और 19 वर्ष की एसीपी की व्यवस्था पर कोई आदेश जारी नहीं हुए। संविदा कार्मिकों के नियमितिकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई।

इसके अतिरिक्त ऊर्जा निगमों में इंसेंटिव एलाउंसेस का रिवीजन और अनेकों समस्याएं अभी तक लंबित हैं, जिस वजह से मोर्चा अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार 27 जुलाई की प्रथम पाली यानी 26 की मध्यरात्रि से अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए बाध्य है।

मोर्चा के संयोजक इसारूल हक ने वार्ता में कई बिंदुओं पर निगमों के अधिकारी जबाव तक नहीं दे पाए। 12 साल से टीजी-2 की पदोन्नति न होने पर सचिव ने जरूर निगम अधिकारियों को फटकार लगाई। कुछ बिंदुओं पर धासन सहमत है, केकिन वह 14 की 14 मांग पर जल्द कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।

कहा कि ऊर्जा निगम के कार्मिक पिछले 4 सालों से एसीपी की पुरानी व्यवस्था और उपनल के माध्यम से कार्योजित संविदा कार्मिकों के नियमितीकरण एवं समान कार्य के लिए समान वेतन को लेकर लगातार शासन प्रशासन से वार्ता कर रहे हैं।

वर्ष 2017 में भी ऊर्जा निगम के कार्मिक आंदोलनरत थे तब 22 दिसंबर 2017 को कार्मिकों के संगठनों तथा सरकार के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ, लेकिन खेदजनक है कि आज तक उस समझौते पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऊर्जा निगम के कार्मिक इससे क्षुब्ध और आक्रोशित हैं।

ऊर्जा कार्मिकों में इस बात को लेकर भी असंतोष छाया है कि सातवें वेतन आयोग में उनकी पुरानी चली आ रही 9-5-5 की  एसीपी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जो कि उन्हें उत्तर प्रदेश के समय से ही मिल रही थी। यही नहीं पे मैट्रिक्स में भी काफी मनमाने बदलाव किए गए।

इससे पूर्व कार्मिक भी कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री के आश्वासन और कोविड के कारण जनहित को देखते हुए 27 मई 2021 की हड़ताल स्थगित कर चुके हैं।

इसी क्रम में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों द्वारा लगातार ज्ञापन एवं पत्र के द्वारा शासन और प्रबंधन से अपील की जाती रही है, लेकिन बावजूद कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण उन्हें फिर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

सभा में जगदीश चंद्र पंत, डीसी ध्यानी, प्रदीप कंसल, विनोद कवि, कार्तिकेय दुबे, दीपक बेनीवाल, अमित रंजन, भानु प्रकाश जोशी, गौविन्द प्रसाद नौटियाल, प्रमोद नरेंद्र नेगी, नीरज तिवारी, प्रदीप प्रकाश शर्मा, सोहनलाल शर्मा समेत सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

 

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