उत्तराखंड में सरकार के खिलाफ भड़का ऊर्जा कर्मियों का गुस्सा, बोले, अबकी बार न झुकेंगे न छले जाएंगे, मांगे नहीं मानी गई तो 27 से प्रस्तावित हड़ताल होकर रहेगी

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल
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देेेहरादून। इस बार ऊर्जा कर्मियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इससे पहले इतने गुस्से में ऊर्जा कर्मी कभी नहीं दिखे। यह पहली बार है जब ऊर्जा के तीनों निगमों के कर्मचारी संगठन एक छत के नीचे आकर सरकार के खिलाफ एकजुट होकर लामबन्द हो रहे हैैं।

सरकार के खिलाफ भड़का ऊर्जा कर्मियों का यह गुस्सा किस करवट बैठेगा यह तो पता नहीं, लेकिन यदि सरकार समय रहते नहीं चेती तो आम जनता को हड़ताल से जरूर समस्याओं से जूझना पड़ेगा। क्योंकि बिजली का सम्बंध हर घर से है। बिजली सिस्टम प्रभावित होने से दफ्तरों को ही नहीं, बल्कि उद्योगों एवं कल कारखानों के साथ ही लघु उद्यमियों समेत बिजली से जुड़े हर व्यवसायी को जूझना पड़ेगा।

ऐसे में यदि जनता हड़ताल से परेशान होती है तो सरकार को बिजली कर्मियों के साथ आम जनता का गुस्से का भी सामना करना पड़ेगा। यही नहीं विपक्षी दल भी इस मुद्दे को 2022 के विधानसभा चुनाव में भुनाने का पूरा प्रयास करेंगे। तब सरकार के पास शायद पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचेगा। कोढ़ पर खाज यह है कि केन्द्र सरकार के द्वारा एक्ट में संशोधन कर किए जा रहे बिजली के निजीकरण को लेकर भी कार्मिको में बेहद असंतोष व्याप्त है।

इधर, विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के विभिन्न घटक संघों की शनिवार को आयोजित आपात सभा यमुना कॉलोनी देहरादून स्थित हाइड्रोइलेक्ट्रिक एंप्लाइज यूनियन के कार्यालय में सम्पन्न हुई। सभा की अध्यक्षता प्रदीप कंसल और संचालन मोर्चा के संयोजक इंसारूल हक ने किया। सभा मे कर्मचारी नेताओ ने हड़ताल का जो खाका तैयार किया है उससे सरकार की मुश्किलें बढ़नी तय बताई जा रही है।

सभा में वक्ताओं ने शासन और प्रबन्धन के नकारात्मक रवैये पर घोर आक्रोश प्रकट किया। कहा कि लगातार कई वर्ष से संघर्ष करने के बाद भी कर्मचारियों की 9, 14 और 19 वर्ष की एसीपी की व्यवस्था पर कोई आदेश जारी नहीं हुए। संविदा कार्मिकों के नियमितिकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई।

इसके अतिरिक्त ऊर्जा निगमों में इंसेंटिव एलाउंसेस का रिवीजन और अनेकों समस्याएं अभी तक लंबित हैं, जिस वजह से मोर्चा अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार 27 जुलाई की प्रथम पाली यानी 26 की मध्यरात्रि से अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए बाध्य है।

मोर्चा के संयोजक इसारूल हक ने शासन से अपील की है कि तत्काल कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाए अन्यथा की स्थिति में 27 जुलाई की प्रथम पाली से ऊर्जा के तीनों निगम यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल में संपूर्ण हड़ताल होनी तय है।

उल्लेखनीय है कि ऊर्जा निगम के कार्मिक पिछले 4 सालों से एसीपी की पुरानी व्यवस्था और उपनल के माध्यम से कार्योजित संविदा कार्मिकों के नियमितीकरण एवं समान कार्य के लिए समान वेतन को लेकर लगातार शासन प्रशासन से वार्ता कर रहे हैं।

वर्ष 2017 में भी ऊर्जा निगम के कार्मिक आंदोलनरत थे तब 22 दिसंबर 2017 को कार्मिकों के संगठनों तथा सरकार के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ, लेकिन खेदजनक है कि आज तक उस समझौते पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऊर्जा निगम के कार्मिक इससे क्षुब्ध और आक्रोशित हैं।

ऊर्जा कार्मिकों में इस बात को लेकर भी असंतोष छाया है कि सातवें वेतन आयोग में उनकी पुरानी चली आ रही 9-5-5 की  एसीपी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जो कि उन्हें उत्तर प्रदेश के समय से ही मिल रही थी। यही नहीं पे मैट्रिक्स में भी काफी मनमाने बदलाव किए गए।

इससे पूर्व कार्मिक भी कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री के आश्वासन और कोविड के कारण जनहित को देखते हुए 27 मई 2021 की हड़ताल स्थगित कर चुके हैं।

इसी क्रम में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों द्वारा लगातार ज्ञापन एवं पत्र के द्वारा शासन और प्रबंधन से अपील की जाती रही है, लेकिन बावजूद कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण उन्हें फिर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

मोर्चे के सभी घटक संगठनों/एसोसिएशनों से अपील की गई है कि वे सभी अपने-अपने सदस्यों को, चाहे नियमित हो, उपनल संविदा हो या स्वंय सहायता समूह के कर्मचारी हों। इस हड़ताल कार्यक्रम को सफल बनाने में शतप्रतिशत भागीदारी दें।

सभा में जगदीश चंद्र पंत, डीसी ध्यानी, प्रदीप कंसल, विनोद कवि, कार्तिकेय दुबे, दीपक बेनीवाल, अमित रंजन, भानु प्रकाश जोशी, गौविन्द प्रसाद नौटियाल, प्रमोद नरेंद्र नेगी, नीरज तिवारी, प्रदीप प्रकाश शर्मा, सोहनलाल शर्मा आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

26 को यूजेवीएनएल मुख्यालय में सत्याग्रह रैली के जरिए जगाएंगे सोई हुई सरकार और गूंगे-बहरे शासन व प्रबन्धन को

मोर्चा पदाधिकारियों ने 26 जुलाई को हड़ताल से पूर्व सरकार, शासन और ऊर्जा निगमों के प्रबंधनों को जगाने के लिए सत्याग्रह आंदोलन की घोषणा की है। सत्याग्रह रैली उत्तराखंड जल विद्युत निगम मुख्यालय पर जाकर सम्पन्न होगी। जिसमें तीनों निगमों के सभी अधिकारी और कर्मचारी शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि  यह रैली ऐतिहासिक होगी, जो मोर्चा के घटक संघों की एकता, एकजुटता के साथ-साथ सरकार को ऊर्जा कर्मियों की ताकत का भी एहसास कराएगी।

मोर्चा पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इसके बाद भी यदि सरकार की आंख नहीं खुली तो अगले रोज यानि 27 तारीख से अनिश्चितकालीन हड़ताल की डगर पर वह चल पड़ेंगे, जिसमें वह मंजिल तक पहुंचने के बाद ही वापस लौटेंगे। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि आम जन समूह का भी बिजली कर्मियों को समर्थन मिल रहा है। उन्होंने जनता से सहयोग की अपील कर कहा कि हड़ताल के दौरान उन्हें भी जूझना पड़ेगा, लेकिन वह ऐसा नही चाहते हैं, सरकार उन्हें इसके लिए मजबूर कर रही है।

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