उत्तराखंड पुलिस सोती रही और दिल्ली पुलिस कर गई ये बड़ा काम

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देहरादून। उत्तराखंड पुुुलिस सोती रही और नकली दवाओं का कारोबार करने वाले धड़ल्ले से काम करते रहे। लेकिन उनके मंसूबों पर तब पानी फिर गया, जब दिल्ली पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। जी हां, उत्तराखंड के हरिद्वार, रुड़की और कोटद्वार में छापेमारी कर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर गिरोह के सरगना समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने मौके से 198 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शनए पैकेजिंग सामग्री और 3000 खाली शीशियां बरामद की है। यह गिरोह उत्तराखंड के हरिद्वारए रुड़की और कोटद्वार में अवैध फैक्टरियोें में नकली रेमडेसिविर का उत्पादन कर रहा था।

एडीडीएल पुलिस कमिश्नर क्राइम शिभेश सिंह ने बताया कि दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने नकली रेमडेसिविर बनाने वाले गिरोह का खुलासा किया है। इस दौरान सात लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

पुलिस ने बताया कि यह लोग एक इंजेक्शन को 25 हजार रुपये में बेचते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से रेमडेसिविर के 196 नकली इंजेक्शन बरामद किए हैं।

वहीं तीन हजार खाली वायल्स भी पुलिस को मिली है। आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वे अब तक कोरोना मरीजों को दो हजार से अधिक रेमडेसिविर के नकली इंजेक्शन बेच चुके हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है।

क्राइम ब्रांच के अनुसार बीते कुछ समय से उनकी टीम को सूचना मिल रही थी कि रेमडेसिविर की कालाबाजारी की जा रही है। इसे लेकर बीते दिनों कई गैंग क्राइम ब्रांच ने पकड़ी हैं।

ऐसा ही एक गैंग क्राइम ब्रांच की इंटरस्टेट सेल ने दक्षिण दिल्ली स्थित बत्रा अस्पताल के पास से बीते सप्ताह पकड़ा था। क्राइम ब्रांच ने यहां से दो आरोपियों मोहन झा और मोहम्मद शोएब को गिरफ्तार कर रेमडेसिविर इंजेक्शन के 10 वायल बरामद किए थे।

मामले में पौड़ी जिले के कोटद्वार में दिल्ली क्राइम ब्रांच और उत्तराखंड पुलिस की टीम छानबीन में जुट गई है। पता लगा है कि पुलिस को यह नकली रेमडेसिविर कहीं और से बरामद हुआ है। जिस पर कोटद्वार की उक्त फैक्टरी का नाम लिखा हुआ है।

कोटद्वार सीओ अनिल जोशी ने बताया कि मौके पर पूछताछ में पता चला है कि नकली रेमडेसिविर बनाने वाले लोगों ने फैक्टरी किराये पर ली थीए लेकिन अभी तक यहां कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है।

दिल्ली की क्राइम ब्रांच के साथ ही उत्तराखंड पुलिस के आला अधिकारी भी इस मामले की जांच में जुटे हुए हैं। इस मामले में हरिद्वार और रुड़की में भी कुछ फैक्टरियों में छानबीन की जा रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि मौत के ये सौदागर नहींनपकडे जाते तो न जाने इन नकली इंजेक्शन से कितने लोगों की जान चले जाती।

जीवनरक्षक दवाओं और ऑक्सीजन आदि की कालाबाजारी रोकने के लिए एसटीएफ ने भी तैयारियां की हैं। शिकायतों के बाद एसटीएफ ने एक और नंबर जारी किया है। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि मुख्यालय ने 9411112780 व्हाट्एस नंबर जारी किया था।

वर्तमान में महामारी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में जीवनरक्षक दवाओं और ऑक्सीजन की मांग बढ़ रही है। शिकायतें हैं कि इनकी कालाबाजारी हो रही है। लिहाजा एक और  मोबाइल नंबर 9412029536 जारी किया है।

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