अभियंता बोले, डीएम नैनीताल कर रहे अमर्यादित सुलूक, मुख्य सचिव से की कार्रवाई की मांग

उत्तराखंड कर्मचारी हलचल
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देहरादून। उत्तराखंड इंजीनियर्स फेडरेशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्य सचिव ओम प्रकाश से वार्ता की। इस दौरान मुख्य सचिव को इंजीनियरों की विभिन्न समस्याएं से अवगत कराया गया। मुख्य सचिव ने प्रतिनिधिमंडल को उनके द्वारा उठाई गई सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए समस्याओं का शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सीएस को एक ज्ञापन हाजी सौंपा। जिसमें उन्होंने नैनीताल के जिलाधिकारी सबिन बंसल कड़ी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अभियन्ताओं ने कहा कि जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा लगातार अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों के साथ उनकी पदीय मर्यादा के विरुद्ध कार्य किया जा रहा है। उनके द्वारा ऐसे आदेश जारी किए जा रहे हैं, जो मुख्य सचिव एवं विभागीय सचिवों द्वारा निर्गत आदेशों के प्रतिकूल है।

अभियन्ताओं ने खास कि विभागीय सचिव के आदेश के बाद भी जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा जनपदीय अधिकारियों का वेतन रोकने के आदेश निरस्त नहीं किए गए है। जिलाधिकारी नैनीताल के व्यवहार के कारण पूरे प्रदेश के अभियंता आक्रोशित हैं। उन्होंने मुख्य सचिव से इस मामले में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने के साथ ही जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा किए गए किए जा रहे अनुचित आदेशों पर रोक लगा कर उन्हें निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने डीएम नैनीताल की बदसलूकी पर रोक न लगाने पर पूरे प्रदेश में आंदोलन को चेताया है।

मुख्य सचिव से हुई वार्ता के दौरान उत्तराखंड इंजीनियर्स फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष इं. एससी पांडे, प्रांतीय महासचिव इं. जितेंद्र सिंह देव, अधिशासी अभियंता एसोसिएशन पेयजल निगम के अध्यक्ष इं. प्रवीण कुमार राय, उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन महासचिव इं. मुकेश कुमार, सिंचाई विभाग अभियंता संघ के महासचिव इं. आर एस बडोनी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

प्रतिनिधिमण्डल ने मुख्य सचिव के समक्ष ये समस्याएं भी उठाई

  • लोक निर्माण विभाग में सीधी भर्ती से नियुक्त सहायक अभियंताओं को दूसरी एसीपी पर 8700 के विरुद्ध दिए जा रहे 7600 के लाभ को विसंगति बताते हुए इसे ठीक किया जाए।
  • कोरोना काल में शासन द्वारा स्थानांतरण पर रोक होने के बाद भी विभिन्न तकनीकी विभागों मे मध्य सत्र में किए गए स्थानांतरण निरस्त किए जाए।
  • मुख्य सचिव के 2012 के उस आदेश को संशोधित किया जाय, जिसमें जिलाधिकारी को जनपदीय अधिकारियों के आकस्मिक अवकाश के स्वीकृति का अधिकार दिया गया है। उक्त अधिकार से अभियांत्रिकी विभागों में प्रशासन के मूल सिद्धांत unity of command का उल्लंघन हो रहा है। साथ ही प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहा है।.
  • राज्य सरकार के अधीन प्रशासन, चिकित्सा विभाग, पुलिस विभाग, अभियंत्रण विभाग, वन विभाग द्वारा आपसी समन्वय से विकास कार्य संपादित कराए जाते हैं, लेकिन प्रायः अंतर विभागीय प्रोटोकॉल जारी न होने के कारण एक विभाग के निम्न अधिकारी द्वारा दूसरे विभाग के उच्च स्तरीय अधिकारी से भी अमर्यादित व्यवहार पत्राचार किया जाता है। ,ऐसे में अंतर विभागीय सामंजस्य को बनाने के लिए अंतर विभागीय प्रोटोकॉल मुख्य सचिव स्तर से जारी किया जाए।
  • प्रदेश में विभिन्न अभियान्त्रिकी विभागों में सीधी भर्ती के सहायक अभियंता के रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए।

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