अखिल भारतीय समानता मंच ने लिया निर्णय, एट्रोसिटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं रोका तो आगामी चुनावों में करेंगे नोटा को ‘वोट’

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मंच के नेता बोले, एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच के सजा के प्रावधान को समाप्त करते हुए जांच के बाद गिरफ्तारी की व्यवस्था करने, पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने को एक्ट बनाने, प्रदेश में सवर्ण आयोग गठित कर केवल आर्थिक आधार पर असल गरीब सामान्य, दलितों और पिछड़ों के लिए वन टाइम आरक्षण की व्यवस्था करने, गोल्डनकार्ड और एनपीएस की अव्यवस्था को जल्द दुरुस्त करे सरकार

देहरादून। अखिल भारतीय समानता मंच (एआईईएफ) उत्तराखंड की प्रांतीय कार्यकारिणी की ऑनलाइन बैठक में कई बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श और मंथन किया गया।

साथ ही संगठन को मजबूत बनाने के अलावा एससी- एसटी एक्ट के दुरूपयोग को रोकने, संवैधानिक अधिकार प्राप्त शक्ति संपन्न सवर्ण आयोग बनाये जाने, आरक्षण को केवल आर्थिक आधार पर तय करके असल जरुरतमंद जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी को एक बार नियुक्ति मात्र में उसका लाभ देने, हर जाति वर्ग के असल जरुरतमंद गरीब को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा और कौशल प्राप्ति के लिए संरक्षण देने की पुरजोर तरीके से मांग उठाई गई है।

बैठक में मंच नेताओं ने गोल्डन कार्ड योजना SGHS के अन्तर्गत नि:शुल्क रोगी पंजीकरण, ओपीडी चिकित्सा , सभी तरह की जांचें, दवाइयों, उपकरणों समेत पंजीकृत अस्पतालों में संचालित हर तरह की चिकित्सा सुविधा का लाभ सेवारत कार्मिकों और पैंशनरों को दिए जाने, विसंगतियां दूर होने तक पूर्व की भांति चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था बहाल रखने, अव्यवस्था और असुविधा भरी गोल्डन कार्ड योजना बंद करने, पुरानी पेन्शन योजना लागू करने की मांग की है।

प्रांतीय अध्यक्ष श्याम लाल शर्मा की अध्यक्षता और प्रांतीय महासचिव जेपी कुकरेती के संचालन में संपन्न हुई बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए प्रांतीय मीडिया प्रभारी वीके धस्माना ने बताया कि प्रदेश में अनुसूचित जाति जनजाति एक्ट के दुरूपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। उक्त एक्ट में बिना दोष सिद्धि के तत्काल गिरफ्तारी पर प्रतिबंध लगाये जाने की मांग की गई ।

कहा कि अनुसूचित जाति जनजाति के सदस्य को रिपोर्ट लिखाने की एवज में मिलने वाली सरकारी धनराशि व मदद, दबाव व शोषण की मंशा उक्त एक्ट के दुरुपयोग के प्रमुख कारण है, जो कि बाद में गलत या झूठ साबित होने पर भी झूठे शिकायतकर्ता को सजा, उसकी संपत्ति जब्त कर सपरिवार उसका आरक्षण समाप्त करके दी गयी है।

वक्ताओं ने कहा कि सरकारी मदद व धनराशि की वसूली का प्रावधान न होने के कारण सवर्णों के उत्पीड़न का हथियार बना हुआ है । उक्त एक्ट में बिना जांच व दोषसिद्धि के गिरफ्तारी की व्यवस्था में परिवर्तन की मांग करते हुए पूर्व की तरह दो या तीन सवर्ण जनरल ओबीसी की गवाही अनिवार्य की जाए।

मांग की गई कि तत्काल संवैधानिक शक्ति व अधिकार संपन्न सवर्ण आयोग का गठन करते हुए केवल आर्थिक आधार पर ही जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी वर्गों के असल जरुरतमंदों के लिए मात्र वन टाइम नियुक्ति में आरक्षण का प्रावधान 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा के भीतर किया जाए।

निर्णय लिया गया कि 2021 तक सकारात्मक निर्णय न होने की दशा में आगामी विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में सवर्ण समाज समेत सभी जागरूक जन नोटा का ही प्रयोग करेंगे ।

मंच नेताओं ने उत्तराखंड में पदोन्नति में आरक्षण समाप्त किए जाने के लिए एक्ट बनाने एवं जिन विभागों, निगमों, संस्थानों में पदोन्नति लंबित हैं वहां शीघ्र ही बिना आरक्षण के पदोन्नति कराने की भी मांग की गई । राज्य कर्मचारियों व पैंशनरों के लिए बनाए गए गोल्डन कार्ड व स्वास्थ्य योजना सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।

मांग की गई कि सेवारत कर्मचारियों एवं सेवानिवृत्त कार्मिकों को योजना के अन्तर्गत पंजीकृत अस्पतालों में उपलब्ध सभी तरह की चिकित्साओं, जांचों, दवाओं को कैशलैस पर्ची, ओपीडी व संबंधित उपकरणों समेत नि:शुल्क और अनिवार्यतः उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।

ऐसा सुनिश्चित होने तक सभी आच्छादितों एवं जिन कार्मिकों व पैंशनरों को गोल्डन कार्ड के बाबजूद चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ नहीं मिला है उन सभी को पुरानी व्यवस्था के अन्तर्गत लाभ अनुमन्य कराया जाय। सभी कार्मिकों शिक्षकों अधिकारियों के लिए राज्य में पुरानी पैन्शन योजना ही लागू की जाय।

इन बातों में हीलाहवाली या बहानेबाजी पर मंच के उद्देश्यों व नीतियों से सहमत जन, युवा, बेरोजगार, अभिभावक आदि आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनावों में नोटा का बटन दबाएंगे या फिर उस उम्मीदवार का नैतिक समर्थन करेंगे जो मंच की मांग का समर्थन करते हैं ।

कोरोनाकाल में आम जनता को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के क्रम में निर्णय लिया गया कि मंच के सदस्य अपने-अपने आस-पड़ोस के पीड़ित व्यक्तियों को पूर्व की तरह ही यथासंभव मदद देते रहने का प्रयास करेंगें।

बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर ओर मौजूद मंच के राष्ट्रीय महासचिव वीपी नौटियाल जी ने कहा कि अखिल भारतीय समानता मंच को मजबूत बनाने का काम किया जायेगा और सवर्ण समाज को उसके हक दिलाने कार्य किया जायेगा । उत्तराखंड स्तर पर भी सवर्ण आयोग गठित करने केवल प्रयास किए जायेंगें।

केन्द्रीय सचिव एलपी रतूड़ी ने कहा कि है सभी को एकजुटता दिखानी होगी और अपने हकों के लिए आगे आना होगा। अखिल भारतीय समानता मंच से उसकी नीतियों से सहमत छात्रों, जनता , अधिवक्ताओं, पूर्वसैनिकों, सभी कार्मिक-शिक्षकों, सेवानिवृत्त जनों, गरीब असल जरुरतमंद दलितों, पिछड़ों, वंचितों और सामान्य को जोड़ना होगा ।

प्रांतीय महामंत्री जेपी कुकरेती ने प्रदेश स्तर पर संगठन का भवन बनाने और संगठन की गतिविधियों को तेज करने पर बल दिया। प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग पर चिंता जताई। प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल शर्मा ने कहा कि अखिल भारतीय समानता मंच सभी के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और प्रदेश में राज्य सरकार से सरकारी तौर पर सवर्ण आयोग बनाने की मांग की जायेगी।

प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल शर्मा ने भी सभी उपस्थित पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया गया। अल्मोड़ा से धीरेन्द्र कुमार पाठक, मनोज लोहनी, पीसी तिवारी प्रांतीय उपाध्यक्ष ने कहा कि अखिल भारतीय समानता मंच के लिए सभी सदस्यों व पदाधिकारियों को मिशन के तौर पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार को गोल्डन कार्ड विसंगतियों व एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग को रोकने के लिए कदम उठाए जाने की बात कही।

बैठक में मीडिया प्रभारी वीके धस्माना, जनपद पौड़ी गढ़वाल से विक्रम सिंह राणा, चमोली से ललित मोहन बिष्ट, रूद्रप्रयाग से मगनानन्द भट्ट उत्तरकाशी से एनएस राणा, पीसी तिवारी, अल्मोड़ा से धीरेन्द्र कुमार पाठक, मनोज लोहनी, कोटद्वार से सरदार नरेश सिंह, बागेश्वर से केसी मिश्रा, देहरादून से सत्यपाल देवरा, राजेंद्र सिंह चौहान , डॉ. विवेकानंद सती, डीएस सरियाल, ऊधमसिंहनगर से आदित्य गहलौत, अतुल चौहान, पिथौरागढ़ से कैलाश पुनेठा, हरिद्वार से जटाशंकर  समेत सभी जिलों के प्रतिनिधियों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया।

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